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Up Kiran, Digital Desk: देश की राजनीति में आगामी चुनावों से पहले विपक्षी दल नई जमीन तैयार करने में जुटे हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इंडिया गठबंधन और पीडीए यानी पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक वर्ग को एकजुट करने की कवायद तेज कर दी है। ओडिशा दौरे के दौरान उनकी सक्रियता यह संकेत देती है कि विपक्ष अब सिर्फ बयानबाजी नहीं बल्कि संगठित रणनीति पर जोर दे रहा है।

ओडिशा से विपक्षी एकजुटता का संदेश

भुवनेश्वर में अखिलेश यादव ने बीजू जनता दल के प्रमुख और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मुलाकात की। इस भेंट को केवल शिष्टाचार नहीं बल्कि विपक्षी तालमेल की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले यह पहल तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के पक्ष में माहौल मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है।

भाजपा की कार्यशैली से सीखने की बात

मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने भाजपा की राजनीति पर तीखे सवाल उठाए लेकिन साथ ही उसकी कार्यशैली की खुलकर चर्चा भी की। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीति को एक पेशे की तरह संचालित करती है और इसी वजह से उससे बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। उनका मानना है कि अगर भाजपा को चुनौती देनी है तो विपक्ष को भी उसी स्तर की प्रोफेशनल तैयारी करनी होगी।

डाटा आधारित राजनीति पर गंभीर आरोप

अखिलेश यादव ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में चुनावी राजनीति का तरीका बदल गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एजेंसियों के सहारे डाटा इकट्ठा कर योजनाबद्ध तरीके से चुनाव लड़ती है। उनका कहना था कि ईडी सीबीआई और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियां इस प्रक्रिया में अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग कर रही हैं। ऐसे में भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्ष को भी तकनीकी और संगठनात्मक मजबूती बढ़ानी होगी।

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बनाम जोड़ने की राजनीति

सपा अध्यक्ष ने भाजपा पर सांप्रदायिक एजेंडा अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब सरकार जनता से किए वादों को पूरा नहीं कर पाती तब समाज को बांटने की राजनीति तेज कर दी जाती है। इसके उलट समाजवादी पार्टी का फोकस सभी वर्गों को जोड़ने पर है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता आंकड़ों को लेकर चुनाव आयोग से जुड़े सवाल भी जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं।

उत्तर प्रदेश की अंदरूनी राजनीति पर टिप्पणी

उत्तर प्रदेश की स्थिति पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि योगी सरकार से ब्राह्मण समाज के कई नेता असंतुष्ट हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि कुछ नेता पहले सक्रिय दिखते थे लेकिन अब चुप्पी साधे हुए हैं। यह असंतोष आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

ममता बनर्जी के लिए खुला समर्थन

अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि बंगाल में एक बार फिर ममता सरकार बनने की संभावना से भाजपा घबराई हुई है। उनका यह भी कहना था कि ओडिशा जैसे संसाधन संपन्न राज्य में जनता के हितों से ज्यादा राजनीतिक फायदे को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी वजह से समाजवादी पार्टी यहां पीडीए वर्ग को मजबूत करने में जुटी है।