UP Kiran,Digital Desk: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के विरुद्ध विपक्ष द्वारा पेश किया गया नो कॉन्फिडेंस मोशन राजनीतिक हलकों में तेज बहस का विषय बन गया है। इस मुद्दे के साथ ही स्पीकर के पद की संवैधानिक और प्रशासनिक ताकत भी फिर से चर्चा में आ गई है। संसद में विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष और सत्तारूढ़ पक्ष के बीच मचे घमासान के बीच, ओम बिरला के इस पद पर होने का असर भारतीय राजनीति पर क्या है, आइए समझते हैं।
लोकसभा स्पीकर का सबसे अहम कार्य
लोकसभा स्पीकर का मुख्य कार्य सदन की कार्यवाही को उचित दिशा में बनाए रखना है। वे सदन की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी चर्चाएँ और कार्यवाही संविधान और निर्धारित नियमों के तहत हों। जब सदन में गरमागरम बहस होती है, तब स्पीकर का कर्तव्य होता है कि वे सदन का माहौल नियंत्रित रखें। उनके पास सदन के किसी सदस्य को अनुशासनहीनता के लिए निलंबित करने या बाहर भेजने का अधिकार है। इसके अलावा, वे यह भी तय करते हैं कि किन विषयों पर चर्चा होगी और किसे बोलने का अवसर मिलेगा।
मनी बिल पर स्पीकर का विशेष अधिकार
लोकसभा स्पीकर के पास एक अहम संवैधानिक अधिकार यह है कि वे तय करते हैं कि कोई बिल मनी बिल के तौर पर पारित होगा या नहीं। यह निर्णय अंतिम होता है और इसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। मनी बिल के तौर पर एक बिल की पहचान राज्यसभा की भूमिका को सीमित कर देती है और यह स्पीकर के फैसले को और भी महत्वपूर्ण बना देती है, खासकर वित्तीय और कर मामलों में।
दलबदल पर स्पीकर का निर्णय
संविधान के दसवें शेड्यूल के तहत स्पीकर को यह अधिकार दिया गया है कि वे दलबदल से संबंधित मामलों पर निर्णय लें। यदि कोई सांसद अपनी पार्टी बदलता है या पार्टी के अनुशासन को तोड़ता है, तो स्पीकर यह तय करते हैं कि उस सदस्य को अयोग्य ठहराना है या नहीं।
वोटिंग में स्पीकर का निर्णय
जब सदन में किसी मुद्दे पर वोटिंग होती है और सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के वोट समान होते हैं, तब स्पीकर के पास अंतिम निर्णय का अधिकार होता है। हालांकि, सामान्य रूप से स्पीकर वोट नहीं करते, लेकिन टाई होने की स्थिति में वे मतदान कर सकते हैं।
प्रशासनिक और संस्थागत नियंत्रण
लोकसभा स्पीकर के पास केवल विधायी शक्तियां ही नहीं, बल्कि कई प्रशासनिक अधिकार भी होते हैं। संसद की सभी समितियाँ स्पीकर की निगरानी में काम करती हैं और वे इन समितियों के चेयरपर्सन की नियुक्ति भी करते हैं। इसके अलावा, स्पीकर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हैं और लोकसभा सचिवालय के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में भी कार्य करते हैं।
ओम बिरला की शक्ति और प्रभाव
ओम बिरला के पास लोकसभा स्पीकर के पद से जुड़ी सभी संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक शक्तियाँ हैं। इन अधिकारों का उपयोग करते हुए वे संसद में व्यवस्था बनाए रखते हैं और भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करते हैं। बिरला का यह पद केवल भारत के राजनीतिक घटनाक्रमों पर ही नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों पर भी बड़ा प्रभाव डालता है।

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