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Up Kiran, Digital Desk: वर्ल्ड मेनोपॉज डे (18 अक्टूबर) पर, यह जानना बहुत जरूरी है कि मेनोपॉज (Menopause) यानी रजोनिवृत्ति सिर्फ महिलाओं के पीरियड्स बंद होने की प्रक्रिया नहीं है. ज्यादातर महिलाएं इसे शरीर में होने वाला एक सामान्य बदलाव मानकर इसके दूसरे खतरनाक प्रभावों को नजरअंदाज कर देती हैं, और इसका सबसे बड़ा खतरा जुड़ा है आपके दिल से.

बहुत सी महिलाएं यह नहीं जानतीं कि मेनोपॉज और दिल की बीमारियों के बीच एक गहरा और छिपा हुआ कनेक्शन है. यह एक ऐसा 'साइलेंट रिस्क' है जो चुपचाप शरीर में बढ़ता रहता है.

हमने जब डॉ. वनिता अरोड़ा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली से इस बारे में बात की, तो उन्होंने जो बताया वह 40-45 की उम्र पार कर रही हर महिला के लिए जानना बेहद जरूरी है.

कैसे मेनोपॉज बनता है आपके दिल का दुश्मन?

डॉ. वनिता बताती हैं कि जब तक महिलाओं को पीरियड्स होते रहते हैं, तब तक उनके शरीर में एस्ट्रोजन (Estrogen) नाम का एक 'जादुई' हार्मोन बनता है. यह हार्मोन महिलाओं के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. यह खून की नसों (धमनियों) को लचीला बनाए रखता है और शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाता है और बुरे कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कंट्रोल में रखता है.

लेकिन जैसे ही 45 से 55 साल की उम्र के बीच मेनोपॉज होता है, एस्ट्रोजन का यह सुरक्षा कवच हट जाता है. इसके बाद शरीर में तेजी से बदलाव होते हैं:

बुरे कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना: एस्ट्रोजन के बिना, बुरा कोलेस्ट्रॉल (LDL) तेजी से बढ़ता है और नसों में जमना शुरू हो जाता है, जिससे ब्लॉकेज का खतरा पैदा होता है.

हाई ब्लड प्रेशर: खून की नसें सख्त होने लगती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर हाई रहने लगता है.

पेट की चर्बी बढ़ना: मेनोपॉज के बाद वजन, खासकर पेट और कमर के आसपास की चर्बी (visceral fat) बढ़ने लगती है, जो सीधे तौर पर दिल की बीमारियों से जुड़ी है.

सरल शब्दों में, जो काम एस्ट्रोजन हार्मोन सालों से चुपचाप आपके लिए कर रहा था, मेनोपॉज के बाद आपको वो खुद करना पड़ता है. अगर आप ऐसा नहीं करतीं, तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर का खतरा पुरुषों के बराबर या उनसे भी ज्यादा हो जाता है.

ये लक्षण दिखें तो न करें नजरअंदाज: मेनोपॉज के दौरान या उसके बाद अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो इसे सिर्फ उम्र का तकाजा मानकर नजरअंदाज न करें. ये आपके दिल की कमजोरी के संकेत हो सकते हैं:

अचानक बहुत तेज गर्मी लगना (Hot flashes)

रात में पसीना आना

दिल की धड़कन का अचानक तेज या अनियमित हो जाना (Palpitations)

सांस फूलना या छोटी-छोटी सांस आना

अचानक बहुत ज्यादा थकान महसूस होना

कैसे रखें अपने दिल को जवान: डॉ. अरोड़ा सलाह देती हैं कि 40 की उम्र के बाद हर महिला को अपनी लाइफस्टाइल को लेकर सावधान हो जाना चाहिए:

नमक और चीनी कम करें: अपनी डाइट से नमक, चीनी और मैदे से बनी चीजें कम कर दें.

रोज 30 मिनट चलें: हफ्ते में कम से कम 5 दिन, 30-40 मिनट की ब्रिस्क वॉक (तेज चाल) जरूर करें.

वजन कंट्रोल में रखें: अपने वजन को अपनी लंबाई के हिसाब से संतुलित रखें.

रेगुलर चेकअप कराएं: 45 की उम्र के बाद साल में एक बार अपना ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल का टेस्ट जरूर कराएं.

स्ट्रेस से दूर रहें: योग और मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.

मेनोपॉज एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके साथ आने वाले खतरों से अनजान रहना आपकी जिंदगी पर भारी पड़ सकता है.