Up kiran,Digital Desk : संसद में गतिरोध के बीच बीते सप्ताह लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने हंगामा, नारेबाजी और वेल में घुसकर प्रदर्शन करने वाले सांसदों के व्यवहार पर गंभीर टिप्पणी की थी। विशेष रूप से महिला सांसदों के खिलाफ उनके बयान को लेकर विपक्षी दलों की महिला सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखा है और इसे अपमानजनक करार दिया है।
क्या लिखा गया पत्र में?
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की महिला सांसदों ने पत्र में कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद और अपमानजनक हैं। सांसदों ने बताया कि उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक ढांचे के तहत प्रधानमंत्री का विरोध किया था, लेकिन उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। पत्र में यह भी लिखा गया कि सभी सांसदों की गरिमा और अधिकारों की सुरक्षा स्पीकर की जिम्मेदारी है।
लोकसभा में क्या हुआ था?
पांच फरवरी को लोकसभा में पीएम मोदी के भाषण के दौरान करीब 8 से 10 महिला सांसद, जिनमें कांग्रेस की तीन सांसद शामिल थीं, पीएम की सीट के पास पहुंचीं और बैनर लेकर खड़ी हो गईं। इससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई और बैठक स्थगित कर दी गई। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि ऐसा व्यवहार संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत था और अप्रिय घटनाएं घट सकती थीं। विपक्ष ने इसे सिर्फ विरोध के रूप में खारिज किया।
संसद में जारी गतिरोध
लोकसभा में लगभग एक सप्ताह से कामकाज ठप है। आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के वक्तव्य को कथित तौर पर रोके जाने के कारण सत्तापक्ष और विपक्षी दलों के बीच गतिरोध बरकरार है।
महिला सांसदों का जोर
पत्र में महिला सांसदों ने लिखा कि सत्ताधारी दल के दबाव में स्पीकर विपक्षी सांसदों के खिलाफ अपमानजनक आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पीएम मोदी के खिलाफ संविधानिक तरीके से विरोध करने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। सांसदों ने यह भी बताया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को चार दिन बीत जाने के बावजूद बोलने की अनुमति नहीं मिली और विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया।
महिला सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे पहली पीढ़ी की नेता हैं, जिन्होंने कठिन संघर्ष और भेदभाव के बावजूद राजनीति में अपनी जगह बनाई है। उनका कहना है कि सत्यनिष्ठा पर हमला हर उस महिला पर हमला है, जो गरिमा और साहस के साथ राजनीति में आगे बढ़ना चाहती है।
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