Up Kiran, Digital Desk: देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कोयले के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए, केंद्र सरकार एक बार फिर बड़ा कदम उठाने जा रही है. कोयला मंत्रालय जल्द ही कमर्शियल कोल माइनिंग यानी निजी क्षेत्र के लिए कोयला खदानों की नीलामी का अगला दौर शुरू करने वाला है. इस पहल का मकसद देश में कोयले का उत्पादन बढ़ाना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करना है.
यह नीलामी प्रक्रिया उस सुधार का हिस्सा है, जिसे 2020 में शुरू किया गया था. तब सरकार ने दशकों बाद कोयला सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोला था, ताकि कोयला उत्पादन में तेज़ी लाई जा सके और देश की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा किया जा सके.
क्या है इस नीलामी का मकसद?
उत्पादन में तेज़ी: निजी कंपनियों के आने से कोयला उत्पादन में न केवल तेज़ी आएगी, बल्कि खदानों में नई टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल बढ़ेगा.
आयात पर निर्भरता कम: भारत अपनी ज़रूरत का एक बड़ा हिस्सा कोयला विदेशों से आयात करता है. घरेलू उत्पादन बढ़ने से देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा.
पारदर्शिता और राजस्व: ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होती है. इससे राज्यों को भी अच्छा खासा राजस्व मिलता है, जिसका इस्तेमाल विकास के कामों में किया जाता है.
रोज़गार के अवसर: नई खदानें शुरू होने से उन इलाकों में रोज़गार के हज़ारों नए मौके पैदा होंगे, जहां ये खदानें स्थित हैं.
कोयला मंत्रालय का मानना है कि यह कदम न सिर्फ देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी कोयला बाज़ार भी तैयार करेगा. सरकार का लक्ष्य एक ऐसे सिस्टम को बनाना है, जहां भारत की कोयला ज़रूरतें देश के भीतर से ही पूरी हो सकें.
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