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Up Kiran, Digital Desk: ज्योतिष और वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में राहु (Rahu) को एक रहस्यमय और शक्तिशाली छाया ग्रह (Shadow Planet) माना जाता है। यह अचानक होने वाली घटनाओं, भ्रम, धोखे और अप्रत्याशित समस्याओं का कारक माना जाता है। जब राहु का प्रभाव किसी व्यक्ति या घर पर नकारात्मक रूप से पड़ता है, तो जीवन में उथल-पुथल मच जाती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ ग्रहों की चाल है, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर में की गई कुछ गलतियां अनजाने में राहु के नकारात्मक प्रभावों को आमंत्रित करती हैं, जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का वास हो जाता है और जीवन में परेशानियां बढ़ने लगती हैं।

क्या आपको भी अपने जीवन में अचानक धन हानि, पारिवारिक कलह, या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? कहीं इसकी वजह आपके घर का वास्तु दोष (Vastu Dosh) तो नहीं? आइए जानते हैं ऐसी 7 वास्तु गलतियों के बारे में, जो राहु को आकर्षित करती हैं और घर की सुख-शांति को भंग कर सकती हैं। इन गलतियों को तुरंत सुधार कर आप राहु के अशुभ प्रभाव (Rahu's Negative Effects) से बच सकते हैं।

राहु क्या है और इसका प्रभाव क्या है?

राहु (Rahu) कोई भौतिक ग्रह नहीं है, बल्कि यह सूर्य और चंद्रमा के पथ पर स्थित एक गणितीय बिंदु है जिसे 'चंद्रमा का उत्तरी नोड' कहा जाता है। ज्योतिष में इसे एक 'छाया ग्रह' माना जाता है जो भ्रम, जुनून, अप्रत्याशित लाभ या हानि, गुप्त शत्रुओं और तकनीकी प्रगति से जुड़ा है। जब राहु किसी घर के वास्तु में दोषपूर्ण स्थिति में होता है, तो यह वहां रहने वाले लोगों के लिए मानसिक तनाव, आर्थिक संकट, निर्णय लेने में कठिनाई और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy at Home) बढ़ने लगती है और सकारात्मकता कम होने लगती है।

राहु को आकर्षित करने वाली 7 वास्तु गलतियां और उनके समाधान:

नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम दिशा) में गंदगी या अव्यवस्था:

गलती: वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) राहु की मुख्य दिशा मानी जाती है। यदि इस दिशा में गंदगी, कबाड़, टूटे-फूटे फर्नीचर, भारी सामान या अंधेरा रहता है, तो यह राहु को अत्यधिक सक्रिय करता है। इसके अलावा, इस दिशा में भूमिगत पानी की टंकी, सेप्टिक टैंक या शौचालय का होना भी राहु के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है।

प्रभाव: यह घर के मुखिया के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है, मानसिक अस्थिरता, निर्णय लेने में असमर्थता, आर्थिक नुकसान और अनचाहे विवादों को जन्म देता है।

समाधान: इस दिशा को हमेशा साफ-सुथरा रखें। यहां कोई भी टूटा हुआ सामान या कबाड़ न रखें। इस स्थान पर हल्के और खुशमिजाज रंगों का प्रयोग करें। भारी, ठोस फर्नीचर रखें और अच्छी रोशनी की व्यवस्था करें।

 सीढ़ियों का दोषपूर्ण निर्माण (विशेषकर सर्पिलाकार सीढ़ियां):

गलती: सीढ़ियां राहु के प्रभाव क्षेत्र में आती हैं। घर में बनी सर्पिलाकार (spiral) सीढ़ियां राहु के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाती हैं, क्योंकि यह ऊर्जा को एक भ्रमित करने वाले पैटर्न में घुमाती हैं। इसके अलावा, अंधेरी, टूटी-फूटी सीढ़ियां या सीढ़ियों के नीचे गंदगी भी राहु दोष उत्पन्न करती है। बेडरूम या किचन के सामने सीढ़ियां होना भी शुभ नहीं माना जाता।

प्रभाव: यह घर के सदस्यों के जीवन में लगातार बाधाएं, दुर्घटनाएं, अनावश्यक यात्राएं और अस्थिरता लाता है। आर्थिक उतार-चढ़ाव और रिश्तों में तनाव भी बढ़ सकता है।

समाधान: सीढ़ियों को हमेशा साफ-सुथरा और अच्छी रोशनी वाला रखें। टूटी हुई सीढ़ियों की तुरंत मरम्मत कराएं। यदि संभव हो तो सर्पिलाकार सीढ़ियों से बचें। सीढ़ियों के नीचे खाली जगह को साफ रखें और कबाड़ जमा न होने दें।

 शौचालय और बाथरूम में गंदगी या लीकेज:

गलती: राहु का संबंध गंदगी और अस्पष्टता से है। घर के शौचालय और बाथरूम यदि गंदे, अव्यवस्थित, टूटे हुए टाइल्स वाले या लगातार लीक करते रहते हैं, तो ये राहु के लिए एक आदर्श वातावरण बनाते हैं। गहरे रंग के, अंधेरे बाथरूम भी राहु को आकर्षित करते हैं।

प्रभाव: यह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं, विशेषकर पेट और त्वचा संबंधी बीमारियों को जन्म दे सकता है। आर्थिक हानि, अनावश्यक खर्च और घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।

समाधान: शौचालय और बाथरूम को हमेशा स्वच्छ, सूखा और व्यवस्थित रखें। नल के लीकेज को तुरंत ठीक करवाएं। यहां हल्के रंगों का प्रयोग करें और सुनिश्चित करें कि पर्याप्त वेंटिलेशन और रोशनी हो।

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में भारी सामान या गंदगी:

गलती: ईशान कोण देवताओं का स्थान और घर का सबसे पवित्र कोना माना जाता है। यह बृहस्पति ग्रह (Guru Grah) और जल तत्व से जुड़ा है, जो ज्ञान, शांति और समृद्धि लाता है। यदि इस दिशा में कबाड़, भारी फर्नीचर, गंदगी या शौचालय जैसी अशुभ चीजें होती हैं, तो यह राहु को प्रबल करता है और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करता है।

प्रभाव: यह घर के सदस्यों में मानसिक तनाव, अनिद्रा, निर्णय लेने में भ्रम और आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।

समाधान: ईशान कोण को हमेशा साफ, हल्का और खुला रखें। यहां पूजा घर बनाना सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा में पानी का स्रोत (जैसे जल कलश) रखना बहुत शुभ होता है।

घर में टूटी-फूटी, बेकार या पुरानी वस्तुएं:

गलती: पुराने, टूटे-फूटे फर्नीचर, बंद घड़ियां, खराब इलेक्ट्रॉनिक्स, फटे कपड़े, या किसी भी प्रकार का कबाड़ घर में मृत ऊर्जा (dead energy) और नकारात्मकता को आकर्षित करता है। राहु ऐसे वातावरण में फलता-फूलता है। खासकर यदि ये चीजें नैऋत्य कोण में रखी हों, तो प्रभाव और भी बढ़ जाता है।

प्रभाव: ये चीजें घर में वित्तीय अवरोध, रिश्तों में दरार, स्वास्थ्य समस्याएं और मानसिक अशांति लाती हैं। यह उन्नति और नए अवसरों को रोकता है।

समाधान: घर से सभी टूटी-फूटी, बेकार और पुरानी अनुपयोगी वस्तुओं को तुरंत हटा दें। जो चीजें काम नहीं आतीं, उन्हें दान कर दें या फेंक दें। घर को हमेशा व्यवस्थित और चीजों को सही हालत में रखें।

 मकड़ी के जाले और गंदगी: गलती: घर में मकड़ी के जाले (Cobwebs) और सामान्य गंदगी नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) के प्रतीक माने जाते हैं। ये राहु के प्रभाव को बढ़ाते हैं और भाग्य के अवरोधक बनते हैं। विशेष रूप से कोनों, छत या ऐसी जगहों पर जाले लगना जहां अक्सर सफाई नहीं होती।

प्रभाव: यह घर में अशांति, धन हानि, और अवसरों की कमी लाता है। घर के सदस्यों में आलस्य और निराशा बढ़ती है।

समाधान: अपने घर की नियमित और पूरी तरह से सफाई करें। दीवारों, छतों और कोनों को हमेशा जाले-मुक्त रखें। घर को साफ-सुथरा और हवादार रखें।

अजीबोगरीब वस्तुएं या नास्तिकता का माहौल:

गलती: राहु भ्रम और अंधविश्वास को बढ़ावा देता है। यदि घर में ऐसी अजीबोगरीब या नकारात्मक कलाकृतियां, डरावनी तस्वीरें या ऐसी वस्तुएं हैं जो भय या भ्रम पैदा करती हैं, तो वे राहु के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ा सकती हैं। साथ ही, घर में अत्यधिक नास्तिक माहौल या आध्यात्मिक गतिविधियों का अभाव भी राहु के अशुभ प्रभाव को बढ़ा सकता है।

प्रभाव: यह घर में भय का माहौल, मानसिक अस्थिरता, अनिद्रा और परिवार के सदस्यों के बीच अविश्वास पैदा करता है।

समाधान: घर से ऐसी सभी नकारात्मक या अजीबोगरीब वस्तुएं हटा दें। धार्मिक चित्रों या मूर्तियों को उचित स्थान पर रखें। घर में सकारात्मकता और आध्यात्मिकता का माहौल बनाएं। नियमित रूप से पूजा-पाठ, ध्यान या मंत्र जाप करें।

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