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Up kiran,Digital Desk : यूक्रेन की धरती एक बार फिर मिसाइलों, ड्रोनों और अंधेरे से कांप उठी है। यह सिर्फ जंग का एक और अध्याय नहीं, बल्कि रूस का एक ऐसा क्रूर और सोचा-समझा हमला है, जिसने 15 लाख लोगों को बर्फीली रातों में बिना बिजली और पानी के रहने पर मजबूर कर दिया है।

48 घंटों में आसमान से बरसी 'आग'

पिछले 48 घंटों में रूस ने आसमान से जैसे क़यामत बरसा दी हो। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 600 ड्रोन और 36 बैलिस्टिक मिसाइलों से यूक्रेन के कई शहरों को एक साथ निशाना बनाया गया।

हमले का मुख्य निशाना थे यूक्रेन के बड़े-बड़े पावर प्लांट और सैन्य अड्डे। इसका नतीजा यह हुआ कि खेरसोन, सूमी और खारकीव जैसे बड़े शहर और उनके आस-पास के इलाके पूरी तरह से अंधेरे में डूब गए।

सिर्फ अँधेरा नहीं, जिंदगी थम गई है

  • घरों में ठंड से बचाने वाले हीटर बंद हो गए हैं।
  • पानी की सप्लाई करने वाले पंपिंग स्टेशन ठप पड़ गए हैं।
  • शहरों की जान कही जाने वाली मेट्रो और ट्राम सेवाएं भी रुक गई हैं।

इस वहशी हमले में 20 से ज़्यादा आम नागरिकों के मारे जाने की भी खबर है, जिससे चारों तरफ मातम और खौफ का माहौल है।

यह कोई आम हमला नहीं, यह 'सैचुरेशन अटैक' है

सैन्य एक्सपर्ट्स इसे 'सैचुरATION अटैक' कह रहे हैं। सोचिए, एक साथ इतने सारे ड्रोन और मिसाइलें दागी जाएं कि दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम ही चकरा जाए। उसे यह समझने का मौका ही न मिले कि किसे रोके और किसे जाने दे। रूस ने ठीक यही किया, जिससे यूक्रेन की वायु-रक्षा प्रणाली काफी हद तक नाकाम हो गई और तबाही ज़्यादा हुई।

मकसद साफ़ है: यूक्रेन को घुटनों पर लाना

युद्ध पर नज़र रखने वाले अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स (जैसे ISW और SIPRI) पहले ही इस बात की चेतावनी दे चुके थे। उन्होंने कहा था कि जैसे ही सर्दियाँ आएंगी और लोगों की निर्भरता बिजली और हीटिंग पर बढ़ेगी, रूस जानबूझकर इन्हीं सुविधाओं पर हमले करेगा।

मकसद बिलकुल साफ़ है - यूक्रेन के लोगों की जिंदगी को इतना मुश्किल बना दो, उन पर इतना सामाजिक और आर्थिक दबाव डाल दो कि उनकी सरकार और सेना घुटनों पर आ जाए और बातचीत या अपनी शर्तें मानने को मजबूर हो जाए। रूस इस जंग को अब 'अधिकतम दबाव' की रणनीति से जीतने की कोशिश कर रहा है।