लखनऊ . घपले घोटालों को लेकर वन निगम एक बार फिर चर्चा में है। खैर की नीलामी में फर्जीवाड़ा में फंसे निगम के बड़े अफसरों के विजिलेंस जाँच पहले से ही प्रचलित हैं। हालाँकि जाँच में आरोपित अफसर मलाईदार पोस्टिंग पा चुके हैं। शासन प्रशासन की कार्रवाई का भय वन निगम के अफसरों के जेहन से निकल चुका है। कारण भ्रष्टाचार को लेकर की गयी शिकायतों पर कोई कार्रवाई न होना इन भ्रष्ट अफसरों के बढे हुए मनोबल का कारण है।
ताजा प्रकरण वन निगम एमडी अरविंद कुमार सिंह को लेकर है। माह दिसंबर 2025 में लखनऊ सदर बाजार स्थित बैंक ऑफ इंडिया में एमडी वन निगम उत्तर प्रदेश के नाम से एक एकाउंट खोला जाता है। फिर उस खाते में एमडी वन निगम द्वारा 64 करोड़ रूपये ट्रांसफर किये जाते हैं एफडी बनाने को लेकर। जानकारी के मुताबिक वन निगम की 64 करोड़ की एफडी जो कि अभी तक HDFC बैंक की विक्रांत खंड शाखा गोमतीनगर में चल रही थी उसे निगम के प्रबंधन द्वारा बैंक ऑफ इंडिया सदर बाजार में ट्रांसफर किया गया। बैंकिंग नियमों के अनुसार 24 घंटे के अंदर एफडी वन निगम में प्राप्त हो जनि थी लेकिन लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी एफडी वन निगम को प्राप्त नहीं हुई।
वन निगम में हड़कंप तब मच गया जब बैंक ऑफ़ इंडिया ने एमडी वन निगम को पत्र लिखकर उससे CCTV फुटेज की ये कहकर मांग की कि इंटरनल इनफोर्समेंट एजेंसीज से इस मामले की जाँच होनी है.
कैसे हुआ खुलासा
शासन के आदेश से 12 दिसंबर 2025 को चीफ एकाउंट अफसर संतोष कुमार की तैनाती होती है लेकिन एमडी वन निगम अरविंद कुमार सिंह द्वारा नए चीफ एकाउंट अफसर को चार्ज न देकर नियम कानून को दरकिनार करते हुए एक जूनियर एकाउंट अफसर वेदपाल को ही चार्ज पर बनाये रखा गया।
आपको बता दें कि वेदपाल से सीनियर एकाउंट अफसर के निगम में रहते हुए भी एक जूनियर एकाउंट अफसर वेदपाल को वन निगम का चार्ज दिया गया। वेदपाल के एकाउंट अफसर रहते हुए वन निगम में कई घपले घोटाले हुए जिसकी शिकायतें भी हुई लेकिन निगम से लेकर शासन प्रशासन ने भ्रष्टाचार की शिकायतों पर मौन साध लिया। एमडी वन निगम का ये खाता भी वेदपाल के कार्यकाल में खोला गया जिसे फर्जी बताया जा रहा है।
नए चीफ एकाउंट अफसर संतोष कुमार का कहना है कि सदर बाजार लखनऊ में बैंक ऑफ इंडिया एमडी वन निगम उत्तर प्रदेश के नाम से फर्जी खाता खोला गया था जिसमें वन निगम उत्तर प्रदेश की एफडी का पैसा जो HDFC बैंक विक्रांत खंड में था उस 64 करोड़ रूपये को इस फर्जी एकाउंट में। मामला जानकारी में आया और एक बड़ा स्कैम होते होते बच गया। निगम का एकाउंट ब्लॉक कर दिया गया निगम का पैसा सेफ है हालाँकि इस फर्जी एकाउंट से पैसा निकालने की कोशिश भी हुई लेकिन घपलेबाज सफल नहीं हुए।
इस मामले को लेकर एमडी वन निगम अरविन्द कुमार सिंह से बात करने की कोशिश की गयी लेकिन एमडी वन निगम नजरें चुराते रहे और इस प्रकरण को लेकर उन्होंने आश्चर्यजनक तरीके से चुप्पी साध ली। फर्जी एकाउंट की बात सामने आने के बाद भी एमडी वन निगम द्वारा अब तक इसकी पुलिस और शासन प्रशासन को सुचना न उनकी संलिप्पता को दर्शाता है।
विभागीय मंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना ने इस मामले में जाँच करा कर कड़ी कार्रवाई की बात कही है। हालाँकि इससे पहले से शासन प्रशासन में वन विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार से संबंधित कई मामले ठन्डे बस्ते में हैं। अब देखना ये होगा कि एमडी वन निगम अरविन्द कुमार सिंह द्वारा किये गए इस स्कैम को लेकर शासन क्या कार्रवाई करता है।…क्रमशः
अगली खबर में आपको बताएँगे क़ि कैसे प्रदुषण नियंतरण बोर्ड में OSD पद रेलवे के इंजीनियर की तैनाती नियम कानून को ताकपर रखकर कर दी जाती है




