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Up kiran,Digital Desk : अवैध रेहड़ी-पटरी वालों (Hawkers) के मुद्दे पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और मुंबई पुलिस को जमकर लताड़ लगाई। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अगर प्रशासन के दावे के मुताबिक आदेशों का पालन हो रहा है, तो फिर परेशान नागरिक बार-बार अदालत का दरवाजा क्यों खटखटा रहे हैं?

'आम आदमी कहां जाएगा?' – कोर्ट का तीखा सवाल

जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की बेंच ने प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा, "BMC कहती है कि यह पुलिस की जिम्मेदारी है, और पुलिस कहती है कि यह BMC का काम है। इस खींचतान के बीच आम आदमी पिस रहा है। अधिकारी या तो अपनी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम नहीं हैं या फिर वे अवैध हॉकर्स के साथ मिले हुए हैं।"

कोर्ट ने ऑन-स्पॉट जांच के लिए भेजे वकील

सुनवाई के दौरान जब BMC ने दावा किया कि उन्होंने अवैध रेहड़ी वालों पर कार्रवाई की है, तो कोर्ट ने इस दावे की सत्यता परखने के लिए तुरंत एक टीम तैनात कर दी। बेंच ने एमिकस क्यूरी जमशेद मिस्त्री और वकील चैतन्य चव्हाण को आदेश दिया कि वे पुलिस के साथ अभी इसी वक्त छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CSMT) और फ्लोरा फाउंटेन के बीच के इलाके का मुआयना करें।

निरीक्षण में क्या आया सामने?

वापस लौटकर वकीलों ने कोर्ट को बताया कि मुख्य इलाका तो साफ नजर आया, लेकिन कोलाबा जैसे क्षेत्रों में लाइसेंस की वैधता को लेकर अब भी भ्रम की स्थिति है। इस पर कोर्ट ने संदेह जताते हुए कहा कि शायद किसी ने पहले ही अधिकारियों या हॉकर्स को 'टिप' दे दी थी कि जांच होने वाली है, इसलिए इलाका साफ मिला।

गोरेगांव मर्चेंट्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई

यह पूरा मामला गोरेगांव मर्चेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि गोरेगांव पश्चिम रेलवे स्टेशन के बाहर अवैध रेहड़ी वालों की गुंडागर्दी बढ़ गई है और स्ट्रीट वेंडिंग कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। कोर्ट ने नाराजगी जताई कि 23 मार्च को दिए गए आदेशों के बावजूद जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।

अगली सुनवाई 28 अप्रैल को

हाई कोर्ट ने अब पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि सड़कों पर विजिट के दौरान अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एक बार हटाए गए रेहड़ी वाले दोबारा कब्जा न करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेशों को नाकाम करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को तय की गई है।