Up kiran,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने का विवाद देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि "मतदान करना एक संवैधानिक अधिकार है" और यह किसी भी अन्य प्रक्रियात्मक चीज से कहीं अधिक महत्वपूर्ण और स्थायी है।
क्या है पूरा विवाद? क्यों बढ़ी ममता बनर्जी और विपक्ष की टेंशन?
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है। चुनाव आयोग ने 9 अप्रैल को पहले चरण वाली सीटों के लिए मतदाता सूचियों को 'फ्रीज' (अंतिम रूप) कर दिया है।
फ्रीज होने का मतलब: एक बार सूची फ्रीज होने के बाद, इसमें नया नाम नहीं जोड़ा जा सकता और न ही हटाए गए नामों को इस चुनाव के लिए दोबारा शामिल किया जा सकता है।
विवाद की जड़: याचिकाकर्ताओं का दावा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान लाखों लोगों के नाम सूची से काट दिए गए हैं। कई लोगों ने इसके खिलाफ अपील की थी, लेकिन उनकी अपीलों पर फैसला होने से पहले ही आयोग ने 9 अप्रैल को सूची को लॉक कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बागची और CJI की अहम टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने प्रक्रियात्मक समय सीमा और संवैधानिक अधिकारों के बीच के अंतर को स्पष्ट किया।
जस्टिस बागची: "हम मतदाता सूची की संरचना पर विचार कर रहे हैं। चुनाव के संदर्भ में एक कट-ऑफ तारीख (9 अप्रैल) होना सामान्य है, लेकिन इसके पीछे मतदाता सूची में शामिल होने और भविष्य के चुनावों में वोट देने का संवैधानिक अधिकार है, जो कहीं अधिक महत्वपूर्ण और स्थायी है।"
CJI सूर्यकांत: मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि किसी भी नागरिक को स्थायी रूप से मतदान से वंचित नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 अप्रैल को विस्तृत सुनवाई करने पर सहमति जताई है।
चुनाव आयोग का क्या है पक्ष?
आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने दलील दी कि चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक समय सीमा (9 अप्रैल) तय करना अनिवार्य था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इस चुनाव के लिए सूची में बदलाव संभव नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नागरिकों के अधिकार खत्म हो गए हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: महत्वपूर्ण तारीखें
| चरण | मतदान की तारीख |
|---|---|
| पहला चरण | 23 अप्रैल 2026 |
| दूसरा चरण | 29 अप्रैल 2026 |
| मतगणना (Results) | 04 मई 2026 |
SIR का असर: भबानीपुर और अन्य हॉट सीटों पर प्रभाव
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, SIR प्रक्रिया के कारण कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर 20 से 25 प्रतिशत तक मतदाताओं के नाम कट गए हैं। इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट भबानीपुर भी शामिल है। विपक्ष का आरोप है कि जानबूझकर एक खास वर्ग के वोट काटे गए हैं, जबकि आयोग का कहना है कि यह शुद्धिकरण प्रक्रिया का हिस्सा है ताकि फर्जी मतदाताओं को हटाया जा सके।
अब सबकी नजरें 13 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि क्या लंबित अपीलों वाले मतदाताओं को वोट देने का कोई विशेष अवसर मिल सकता है या नहीं।
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