Up kiran,Digital Desk : पश्चिम बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीट भवानीपुर में मतदान से पहले सियासी पारा चढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर भवानीपुर के रिटर्निंग ऑफिसर सुरजीत राय को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने की मांग की है। टीएमसी का दावा है कि राय भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता खतरे में पड़ सकती है। 26 मार्च 2026 को जारी इस विवाद ने बंगाल की चुनावी राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।
सुवेंदु अधिकारी और सुरजीत राय का क्या है कनेक्शन?
टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं:
नंदीग्राम कनेक्शन: सुरजीत राय (2011 बैच के WBCS अधिकारी) पहले नंदीग्राम-2 ब्लॉक के बीडीओ रह चुके हैं। टीएमसी का आरोप है कि उस दौरान उनके सुवेंदु अधिकारी के साथ घनिष्ठ संबंध रहे हैं।
पद की गरिमा पर सवाल: टीएमसी का तर्क है कि भवानीपुर जैसी वीवीआईपी सीट पर आमतौर पर संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति होती है, जबकि राय वर्तमान में भूमि रिकॉर्ड के अतिरिक्त निदेशक हैं, जो इस पद की वरिष्ठता के अनुरूप नहीं है।
निष्पक्षता का मुद्दा: चूंकि सुवेंदु अधिकारी खुद भवानीपुर से भाजपा के प्रत्याशी हैं, इसलिए टीएमसी का मानना है कि राय की मौजूदगी में स्वतंत्र और पारदर्शी मतदान संभव नहीं होगा।
पुलिस पर्यवेक्षक जयंत कांत पर भी बरसी टीएमसी
सिर्फ रिटर्निंग ऑफिसर ही नहीं, टीएमसी ने आईपीएस अधिकारी जयंत कांत की पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्ति पर भी कड़ी आपत्ति जताई है।
पारिवारिक राजनीतिक संबंध: पार्टी का दावा है कि जयंत कांत की पत्नी स्मृति पासवान बिहार में भाजपा की एक सक्रिय नेता हैं।
प्रभावित क्षेत्र: जयंत कांत को मालदा जिले की उन सीटों (मोथाबारी, वैष्णवनगर आदि) का प्रभार दिया गया है जो बिहार सीमा से सटी हैं। टीएमसी का आरोप है कि ऐसे में निष्पक्ष चुनावी निगरानी संभव नहीं है।
इफ्तार पार्टी में शामिल होने पर 7 जवान सस्पेंड
चुनाव आयोग ने अनुशासन बनाए रखने के लिए एक बड़ी कार्रवाई भी की है। मुर्शिदाबाद जिले में ड्यूटी तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) के सात जवानों पर गाज गिरी है।
आरोप: ये जवान अपनी ड्यूटी छोड़कर एक स्थानीय राजनीतिक नेता की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए थे।
आयोग का रुख: चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा बलों का किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति से सुविधा लेना या सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
भवानीपुर सीट क्यों है इतनी खास?
भवानीपुर सीट बंगाल की राजनीति का केंद्र मानी जाती है। यहां से सुवेंदु अधिकारी और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर है। टीएमसी की इन शिकायतों से साफ है कि पार्टी प्रशासन के हर कदम पर पैनी नजर रख रही है ताकि 2021 के नंदीग्राम जैसे किसी भी विवाद की पुनरावृत्ति न हो।
_144074735_100x75.jpg)



