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उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर के संकरी सीढ़ियों पर रविवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ में अचानक भगदड़ मच गई, जिससे छह लोगों की जान चली गई और कम से कम 28‑35 लोग घायल हो गए।

यह हादसा करीब सुबह 9 बजे मंदिर की ऊंचाई वाली राह के पास हुआ, जब चल रही अफवाह के अनुसार एक उच्च वोल्टेज तार टूटकर नीचे आ गया था। इस खबर ने तीर्थयात्रियों में भय पैदा कर दिया, जिसकी वजह से अचानक धक्का‑मुक्की शुरू हुई और स्थिति बिगड़ गई। हालांकि मंदिर प्रबंधन ने पुष्टि की कि गिरावट या बिजली का संचार इस घटना का कारण नहीं था, बल्कि एक श्रद्धालु के फिसलने से अफरातफरी शुरू हुई थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह अत्यंत दुखद घटना है और उन्होंने प्रभावित परिवारों को दो लाख रुपये प्रति मृतक और घायलों को 50,000‑50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की । घटना स्थल पर आपातकालीन टीम, एसडीआरएफ और फायर ब्रिगेड तुरंत पहुँची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया; उनमें से कुछ को AIIMS रिषिकेश में रैफर किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर गहरा दुःख जताया और प्रभावितों के प्रति संवेदना प्रकट की, साथ ही घायलों की शीघ्र ​स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

प्रशासन ने घटना के तुरंत बाद मेजिस्ट्रेट‑स्तरीय जांच (magisterial probe) का आदेश दिया है, ताकि अफवाह फैलाने वालों की पहचान की जा सके और भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।

दूसरी ओर, तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने सोशल मीडिया पर सुरक्षा इंतज़ामों की कमी और भीड़ प्रबंधन में त्रुटियों पर सवाल खड़े किए हैं। ये घटना इस बात की याद दिलाती है कि श्रद्धा के इस आयोजन में भले लोग जुटते हों, लेकिन सुरक्षात्मक व्यवस्थाओं के बिना आस्था कहीं त्रासदी में न बदल जाए। प्रशासन पर अब तैयारी और प्रभावी crowd control पर ध्यान देने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

 

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