Up kiran,Digital Desk : सोशल मीडिया और महाकुंभ के जरिए 'IIT वाले बाबा' के नाम से मशहूर हुए अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका वैराग्य नहीं, बल्कि उनका गृहस्थ जीवन में प्रवेश है। अभय सिंह ने प्रीतिका नाम की युवती से हिमाचल प्रदेश के एक प्राचीन और बेहद प्रभावशाली मंदिर में शादी रचाई है। यह वही मंदिर है जहां कभी शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह ने साक्षात चमत्कार देखा था। धौलाधार की पहाड़ियों में स्थित इस अघंजर महादेव मंदिर की महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है।
महाकुंभ के 'IITियन साधु' ने प्रीतिका को बनाया जीवनसंगिनी
अभय सिंह, जिन्हें लोग उनके उच्च शिक्षित बैकग्राउंड और आध्यात्मिक झुकाव के कारण 'IIT वाले बाबा' कहते थे, उन्होंने 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शादी की। उनकी पत्नी प्रीतिका भी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से ताल्लुक रखती हैं। सोमवार को जब यह जोड़ा अभय सिंह के पैतृक गांव पहुंचा, तब इस गोपनीय विवाह का खुलासा हुआ। अभय के मुताबिक, उन्होंने हिमाचल के धर्मशाला स्थित अघंजर महादेव मंदिर में सात फेरे लिए और बाद में 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की।
अघंजर महादेव: जहां पापों का होता है नाश
धर्मशाला से करीब 8 किलोमीटर दूर खनियारा में स्थित अघंजर महादेव मंदिर का नाम 'अघ' (पाप) और 'अंजर' (नाश करने वाले) से बना है। धौलाधार पर्वतमाला की गोद में बसा यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति का केंद्र है। मंदिर के पास से बहती शीतल जल की खड्ड और वहां का शांत वातावरण किसी को भी मंत्रमुग्ध कर देता है। कहा जाता है कि यहां सदियों से एक अखंड धूनी जल रही है, जिसे बाबा गंगा भारती ने प्रज्ज्वलित किया था।
जब महाराजा रणजीत सिंह ने देखा धूनी का चमत्कार
इस मंदिर का इतिहास महाराजा रणजीत सिंह के एक रोचक प्रसंग से जुड़ा है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, महाराजा रणजीत सिंह जब यहां आए थे, तो उन्होंने बाबा गंगा भारती को एक कीमती शॉल भेंट की थी। बाबा ने अपनी सिद्धियों का परिचय देते हुए धूनी से कई वैसी ही शॉलें निकाल दीं और महाराजा से अपनी वाली पहचानने को कहा।
इतना ही नहीं, एक बार जब महाराजा रणजीत सिंह बीमार हुए और उन्हें पेट संबंधी गंभीर समस्या हुई, तो बाबा गंगा भारती ने धूनी के पास का जल तीन अंजुलियों में भरकर उन्हें पीने को दिया। वह जल पीते ही महाराजा पूरी तरह स्वस्थ हो गए। इस चमत्कार से प्रभावित होकर महाराजा ने यहां जमीन दान की और भव्य मंदिर का निर्माण करवाया।
जूना अखाड़े से है मंदिर का गहरा संबंध
अघंजर महादेव मंदिर का प्रबंधन वर्तमान में दशनामी जूना अखाड़े के पास है। मंदिर परिसर में कई महान संतों की समाधियां मौजूद हैं, जो इसकी प्राचीनता और धार्मिक महत्व को दर्शाती हैं। महाशिवरात्रि के दिन यहां भारी मेला लगता है और इसी विशेष दिन को अभय सिंह ने अपनी नई पारी की शुरुआत के लिए चुना। अभय ने बताया कि वह पिछले कुछ समय से धर्मशाला के ही शांत इलाकों में समय बिता रहे थे, जहां उनकी मुलाकात प्रीतिका से हुई और दोनों ने अध्यात्म के साथ-साथ जीवन पथ पर साथ चलने का फैसला किया।




