Up kiran,Digital Desk : बिहार की राजनीति में आज का दिन बेहद भावुक और ऐतिहासिक रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने और उनके राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच जेडीयू के कद्दावर नेता और मंत्री अशोक चौधरी अपने आंसू नहीं रोक पाए। नीतीश कुमार को अपना 'मानस पिता' और राजनीतिक गुरु मानने वाले अशोक चौधरी मीडिया के सामने ही फूट-फूटकर रोने लगे और पुराने दिनों को याद कर भावुक हो गए।
'गुरु, पिता और रक्षक... सब कुछ थे नीतीश'
रुंधे गले से पत्रकारों से बात करते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि देश की राजनीति में नीतीश कुमार जैसा दूसरा कोई नेता नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों से सदन में उनके साथ रहने का अनुभव किसी ट्रेनिंग से कम नहीं था। चौधरी ने कहा, "जब मैं कांग्रेस में था, तब भी उन्होंने मुझे पिता समान स्नेह और सम्मान दिया। कोरोना काल की विभीषण परिस्थितियों में उन्होंने मेरा हाथ थामा और एक अभिभावक की तरह संरक्षण दिया।"
जब सदन में मंत्रियों को 'बेल आउट' करते थे नीतीश
नीतीश कुमार के कार्यशैली की चर्चा करते हुए अशोक चौधरी ने बताया कि सदन में उनका नियंत्रण अद्भुत था। वे न केवल अपने मंत्रियों को डांटते और पुचकारते थे, बल्कि जब भी कोई मंत्री विपक्ष के सवालों में फंस जाता था, तो नीतीश जी खुद आगे आकर उन्हें 'बेल आउट' (बचाव) करते थे। चौधरी ने कहा कि विरोधियों का सम्मान करना और उनकी सुविधाओं का ख्याल रखना नीतीश जी की सबसे बड़ी खूबी रही है।
मैट्रिक परीक्षा और बिहार की छवि का वो मशहूर किस्सा
अशोक चौधरी ने शिक्षा मंत्री के तौर पर बिताए दिनों का एक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार मैट्रिक की परीक्षा में दीवार पर चढ़कर चोरी करने की फोटो अखबारों में छपी थी, जिससे बिहार की काफी बदनामी हुई थी। तब नीतीश कुमार ने उन्हें बुलाकर बड़ी गंभीरता से कहा था, "चाहे जो हो जाए, बिहार की छवि के लिए इस चोरी को तुरंत बंद करवाइए।" चौधरी ने कहा कि आज जो बिहार की बेटियां परीक्षा में झंडे गाड़ रही हैं, वह नीतीश कुमार के कड़े फैसलों और समाज सुधार की ही देन है।
मदन मोहन मालवीय से की नीतीश की तुलना
अशोक चौधरी ने भावुक होते हुए कहा कि आने वाले समय में इतिहास नीतीश कुमार को विद्याचंद सागर और मदन मोहन मालवीय जैसे समाज सुधारकों की श्रेणी में रखेगा। उन्होंने कहा, "आज सदन में उनकी कमी बहुत खलेगी। हालांकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत इस्तीफा जरूरी था, लेकिन एक शिष्य के लिए अपने गुरु का सानिध्य कम होना बहुत पीड़ादायक है।" बता दें कि नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन वे फिलहाल मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे।




