Up Kiran, Digital Desk: महाभारत के युग के महान चिंतक महात्मा विदुर को "धर्मराज का अवतार" माना जाता है। उनकी विदुर नीति, जो महाराजा धृतराष्ट्र को दिए गए उपदेशों का संकलन है, आज भी समाज के लिए प्रासंगिक बनी हुई है। यह नीति न केवल व्यक्तिगत जीवन, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों के महत्व को भी उजागर करती है। विदुर जी का मानना था कि एक इंसान की आदतें और आचरण ही उसकी जिंदगी का दिशा निर्धारण करते हैं। समाज में प्रतिष्ठा अर्जित करना कठिन है, परंतु उसे खोना उतना ही सरल।
आइए जानते हैं, विदुर जी के उपदेशों के माध्यम से उन आदतों के बारे में, जो समाज में हमारी छवि और रिश्तों को प्रभावित करती हैं।
1. कठोर वाणी: रिश्तों की नींव पर खतरा
विदुर जी के अनुसार, वाणी में वह शक्ति है, जो किसी भी रिश्ते को बना या बिगाड़ सकती है। अगर आप अपनी जुबान पर काबू नहीं पा सकते और दूसरों से कठोर शब्दों में बात करते हैं, तो यह न केवल आपके स्वभाव को कठोर बना देता है, बल्कि समाज में भी आपकी छवि अहंकारी की बन जाती है। इस प्रकार के शब्द दिल में गहरे घाव छोड़ते हैं और रिश्तों को खंडित कर देते हैं। यदि आप हमेशा अपनों के साथ भी सख्त शब्दों का प्रयोग करते हैं, तो धीरे-धीरे वे आपसे दूर हो सकते हैं।
2. ईर्ष्या और निंदा: अपनी असफलता का कारण
दूसरी सबसे खतरनाक आदत, जो किसी की छवि को नुकसान पहुंचाती है, वह है दूसरों से जलना और उनके बारे में नकारात्मक बातें करना। विदुर नीति के अनुसार, जो लोग दूसरों के दोष निकालने में अपना समय बर्बाद करते हैं, वे कभी अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते। अगर आप किसी के बारे में बुरा बोलते हैं, तो आपके मित्र को यह लगने लगता है कि आप उसके बारे में भी वैसा ही सोचते होंगे। इससे रिश्तों में विश्वास की दीवार दरकने लगती है। विदुर जी का कहना था कि ईर्ष्या सिर्फ उस व्यक्ति को नुकसान पहुंचाती है, जो इसे अपने अंदर पालता है।
3. क्रोध: रिश्तों की टूटन और मानसिक अस्थिरता
विदुर नीति में क्रोध को एक बड़ा दोष माना गया है। उनका मानना था कि क्रोध एक ऐसा राक्षस है, जो इंसान के विचार और समझने की क्षमता को नष्ट कर देता है। एक पल का गुस्सा जीवन भर के रिश्तों को नष्ट कर सकता है। जब आप छोटी-छोटी बातों पर उग्र हो जाते हैं, तो लोग आपसे डरने लगते हैं, परंतु उनका आदर या सम्मान नहीं करते। लोग अगर डर से आपसे जुड़ते हैं तो एक दिन मौका मिलते ही वे आपको छोड़ सकते हैं। लगातार क्रोधित रहने वाले व्यक्ति को समाज मानसिक अस्थिरता का शिकार मानता है, जिससे वह किसी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लायक नहीं रह जाता।
4. आलस्य और टालमटोल: सफलता की सबसे बड़ी बाधा
आलस्य को अक्सर एक व्यक्तिगत कमजोरी के रूप में देखा जाता है, लेकिन विदुर जी इसे एक गंभीर सामाजिक समस्या मानते थे। जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समय पर नहीं निभाता और हमेशा आलस्य में डूबा रहता है, वह धीरे-धीरे समाज में अपनी विश्वसनीयता खो देता है। जब आप किसी से वादा करते हैं और उसे आलस्य के कारण पूरा नहीं कर पाते, तो यह आपकी छवि को कमजोर कर देता है। इस कारण लोग आप पर भरोसा करना छोड़ देते हैं। आलस्य से बचकर ही सफलता और सम्मान प्राप्त किया जा सकता है। विदुर जी का मानना था कि जो व्यक्ति कर्मठ होता है, वही समाज में सम्मान पाता है।
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