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Up Kiran, Digital Desk: अमेरिका ने भारत से आने वाले कई सामानों पर टैक्स बढ़ा दिया है, जिससे भारतीय बाजार में थोड़ी हलचल मची हुई है। इस फैसले का असर कुछ उद्योगों पर तो बहुत गहरा पड़ने वाला है, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें इससे खास फर्क नहीं पड़ेगा। आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर हो क्या रहा है और इसका आम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है।

इन उद्योगों पर मंडरा रहा है संकट

सोचिए, आप एक कारीगर हैं जो खूबसूरत गहने बनाते हैं या फिर किसी कपड़ा फैक्ट्री में काम करते हैं। आपकी बनाई चीजें अमेरिका भेजी जाती हैं। अब अमेरिकी सरकार ने इन पर टैक्स बढ़ा दिया है, जिससे वहां ये चीजें महंगी हो जाएंगी। जाहिर है, जब चीजें महंगी होंगी तो उनकी मांग कम हो जाएगी।

कपड़ा, रत्न और आभूषण जैसे उद्योग, जिनमें बहुत सारे लोगों को रोजगार मिलता है, इस नए फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।अमेरिका इन भारतीय उत्पादों का एक बहुत बड़ा बाजार है।अब टैक्स बढ़ने से भारतीय सामानों के लिए चीन और वियतनाम जैसे देशों से मुकाबला करना और भी मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि उन पर टैक्स कम है। इसका सीधा असर इन उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ सकता है। समुद्री खाद्य, चमड़ा और कुछ मशीनरी जैसे सामान भेजने वाले निर्यातकों के लिए भी यह एक चिंता का विषय है।

इन्हें मिली राहत, नहीं है कोई टेंशन

हालांकि, इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है। भारत के फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर इस टैरिफ का कोई असर नहीं होगा। अमेरिका ने इन सेक्टरों को टैक्स की इस बढ़ोतरी से दूर रखा है। इसका मतलब है कि भारत में बनने वाली दवाइयां और स्मार्टफोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान पहले की तरह ही अमेरिकी बाजारों में बिकते रहेंगे।यह एक बड़ी राहत की बात है, क्योंकि भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का एक बहुत बड़ा सप्लायर है और हाल के दिनों में इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आखिर अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया?

अमेरिका ने यह कदम भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के जवाब में उठाया है।हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत का दौर जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही कोई समाधान निकल आएगा।

अमेरिका के इस फैसले ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने एक नई चुनौती पेश कर दी है। जहां एक तरफ कपड़ा और आभूषण जैसे पारंपरिक उद्योगों को संघर्ष करना पड़ सकता है, वहीं दूसरी तरफ फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए जमाने के सेक्टरों ने अपनी मजबूती दिखाई है। अब देखना यह है कि आने वाले समय में भारत इस चुनौती का सामना कैसे करता है।

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