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Up Kiran,Digital Desk: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने अपनी ताकत दिखाते हुए केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने मनरेगा में किए गए संशोधनों को लेकर अपनी चिंता जताते हुए विधानसभा तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य गरीबों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना था, जिनका मानना है कि इन बदलावों से उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

गैंती, तगारी और फावड़े के साथ विरोध प्रदर्शन

विधानसभा के गेट पर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और अन्य विधायकों ने खास अंदाज में प्रदर्शन किया। वे गैंती, तगारी और फावड़े लेकर पहुंचे और जोरदार नारेबाजी की। कांग्रेस का यह कदम न केवल सरकार के खिलाफ एक शक्ति प्रदर्शन था, बल्कि यह दिखाने की कोशिश भी थी कि पार्टी गरीबों और श्रमिकों के मुद्दों को लेकर कितनी गंभीर है। प्रदर्शनकारियों ने मनरेगा में किए गए संशोधनों को तत्काल वापस लेने की मांग की। हालांकि, सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें विधानसभा में प्रवेश करने से पहले रोक लिया, जिसके बाद वे बिना उपकरणों के अंदर दाखिल हुए।

नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा

टीकाराम जूली ने इस मौके पर कहा कि केंद्र सरकार ने गरीबों और मजदूरों का हक छीन लिया है। उनका आरोप था कि यह सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रही है और गरीबों की तकलीफों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस विरोध को न केवल सदन के अंदर, बल्कि बाहर भी जारी रखेगी। जूली ने भाजपा सरकार पर युवाओं और किसानों के साथ किए गए वादों को तोड़ने का भी आरोप लगाया और यह भी कहा कि राज्य में अपराधों की बढ़ती संख्या से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा।

रफीक खान ने नरेगा पर चर्चा की जरूरत बताई

कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक खान ने इस प्रदर्शन के दौरान नरेगा के मुद्दे पर अपनी चिंता जताई। उनका कहना था कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही और नरेगा पर चर्चा जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत किए गए बदलावों से न केवल मजदूरों की हालत खराब होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का संकट भी बढ़ेगा।