Up Kiran, Digital Desk: यूके में सड़क सुरक्षा को लेकर अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने 70 साल या उससे अधिक उम्र के ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करते समय आंखों की जांच करवाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है। यदि कोई ड्राइवर इस जांच में पास नहीं हो पाता या इसे कराने से मना करता है तो उसकी ड्राइविंग पर तत्काल रोक लग जाएगी। यह कदम सड़क हादसों को कम करने के लिए उठाया गया है खासकर बुजुर्ग ड्राइवरों के मामलों में।
क्यों जरूरी है यह कदम
वर्तमान में ब्रिटेन में 70 साल से ऊपर के ड्राइवरों को अपनी आंखों की स्थिति के बारे में खुद ही रिपोर्ट करना होता है। इसे "सेल्फ-रिपोर्टिंग" कहा जाता है। हालांकि यह व्यवस्था अब तक पूरी तरह से सफल नहीं रही। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से सैकड़ों जिंदगियों को बचाया जा सकता था लेकिन इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी नहीं आई।
आंकड़े जो चिंताजनक हैं
बुजुर्ग ड्राइवरों की हिस्सेदारी: 2024 के आंकड़ों के मुताबिक सड़क हादसों में मारे गए ड्राइवरों में से 24 प्रतिशत की उम्र 70 साल या उससे अधिक थी।
सड़क हादसों में बुजुर्गों का प्रभाव: कुल दुर्घटनाओं में 12 प्रतिशत ऐसे मामले थे जिनमें बुजुर्ग ड्राइवर शामिल थे।
क्या कहते हैं चिकित्सा विशेषज्ञ
नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार 56 प्रतिशत ने पिछले एक महीने में उन मरीजों को देखा है जिनकी आंखों की रोशनी कम हो चुकी थी लेकिन वे फिर भी वाहन चला रहे थे। इस मामले में 14 प्रतिशत लोग ऐसे भी थे जिनके परिजन इस समस्या के बावजूद सड़क पर गाड़ी चला रहे थे।
नए नियमों से क्या बदलेगा
ब्रिटेन सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार 70 साल और उससे अधिक उम्र के ड्राइवरों को अब अपने ड्राइविंग लाइसेंस को रिन्यू कराने से पहले आंखों की जांच करवानी होगी। इसके बिना लाइसेंस रिन्यू नहीं हो सकेगा। साथ ही अगर किसी ड्राइवर को फिट नहीं पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा जो ड्राइवर पहले ही अनफिट घोषित किए जा चुके हैं और फिर भी गाड़ी चला रहे हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस नए नियम का उद्देश्य सड़क पर अनफिट ड्राइवरों को रोकना है जिससे दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाई जा सके।
भारत में बुजुर्ग ड्राइवरों के लिए नियम
भारत में भी इस मुद्दे पर ध्यान दिया जा रहा है जहां 50 साल या उससे अधिक उम्र के ड्राइवरों को अपनी ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करने के दौरान चिकित्सा प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। इसके साथ ही भारतीय नियमों के तहत ड्राइवर का शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति बिना वैध लाइसेंस के या अनफिट होकर वाहन चलाता है तो उस पर जुर्माना और सजा का प्रावधान है।
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