CORONA के बाद अब दुनिया पर मंडराया ये नया खतरा, हो सकती है महाप्रलय की शुरूआत

नई दिल्ली ।। पूरा विश्व वर्तमान CORONA__VIRUS के प्रकोप से परेशान है। इस बीच पृथ्वी पर एक और बड़ा संकट मंडरा रहा है। इस नए संकट से महाप्रलय आ सकता है। तो चलिए जानते हैं क्या है वो नया खतरा?

खबर है कि उत्‍तरी ध्रुव पर आर्कटिक के ऊपर ओजोन परत में काफी बड़ा छेद हो गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह छेद करीब 10 लाख वर्ग किलोमीटर का है। साइंटिस्टों ने बताया कि इससे महाप्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आर्कटिक के ऊपर ओजोन परत में बने इस नए छेद का कारण वातावरण में हो रहे बदलाव के कारण है।

उत्‍तरी ध्रुव पर इस समय अप्रत्‍याशित तौर पर मौसम बीते कई वर्षों की तुलना में अधिक ठंडा है। दरअसल, दोनों ही ध्रुवों पर सर्दी के मौसम में ओजोन की कमी आ जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा आर्कटिक पर अंटार्कटिका के मुकाबले बहुत कम होता है। ओजोन परत में यह छिद्र ध्रुवों पर तापमान बहुत ही अधिक कम होने, सूर्य की रोशनी, बहुत बड़े हवा के भंवर और क्लोरोफ्लोरो कार्बन पदार्थों के कारण होता है।

उत्तरी ध्रुव पर आमतौर पर अंटार्कटिका जैसी भयंकर ठण्ड नहीं होती। लेकिन इस साल उत्तरी ध्रुव पर बहुत ही ज्यादा ठंड पड़ी। इससे स्ट्रटोस्फियर पर एक पोलर वोर्टेक्स बन गया। फिर जब ठंड का मौसम गया तो वहां सूर्य की रोशनी पहुंची। इसके बाद ओजोन परत खत्म होना शुरू हुआ। हालांकि इसकी मात्रा दक्षिण ध्रुव की तुलना में काफी कम रही। वैज्ञानिकों ने पाया कि आर्कटिक क्षेत्र के ऊपर ओजोन की मात्रा में बहुत ज्यादा गिरावट हुई। जिससे ओजोन परत में काफी बड़ा छेद हो गया।

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गौरतलब हों कि ओजोन का काम पृथ्वी की सतह पर सूर्य से आने वाली हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों को रोकना होता है। इससे पृथ्‍वी पर जीवन को लेकर कई समस्याएं हो सकती हैं। अब अल्ट्रावॉयलेट किरणें सीधे धरती की सतह पर आएंगी। जानकारों का मानना है कि CORONA__VIRUS की वजह से इस समय पूरी दुनिया में लॉकडाउन है। इसके कारण ओजोन लेयर में बने इस होल की पूरी कार्यप्रणाली ही गड़बड़ा गई है।

साइंटिस्टों ने बताया कि ओजोन लेयर में छेद होना सार्वजनिक चिंता का विषय है। ओजोन परत में छेद होने की वजह से आर्कटिक क्षेत्र में गर्मी बढ़ेगी। इससे यहां मौजूद बर्फ पिघलने की रफ्तार में बढ़ोत्तरी होगी। सूर्य की रेज सीधे धरती की सतह पर पहुंचने के कारण लोगों में स्किन कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी बढ़ेगी।

चिली के पंटा एरेनास की रिसर्च बताती है कि ओजोन में कमी और UVB स्तर में वृद्धि के साथ कारण लोगों में आंख के मोतियाबिंद की शिकायत बढ़ सकती है। यूवी विकिरण में वृद्धि से फसलों को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है।

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