4700 साल तक खारे पानी में रहने के बाद भी नहीं सड़ा ये चिपचिपा पदार्थ, मलबे में मिली वो चीज जिसने साइंस को हिला दिया

4700 साल तक खारे पानी में रहने के बाद भी नहीं सड़ा ये चिपचिपा पदार्थ, मलबे में मिली वो चीज जिसने साइंस को हिला दिया

भूमध्य सागर की गहराइयों में वैज्ञानिकों के हाथ इतिहास का सबसे बड़ा 'टाइम कैप्सूल' लगा है। तुर्की के एंटाल्या स्थित केकोवा द्वीप के पास 30 मीटर पानी के नीचे करीब 4700 साल पुराने एक व्यापारिक जहाज का मलबा मिला है। जब गोताखोरों ने मलबे से निकले प्राचीन मिट्टी के बर्तनों के अंदर झांका, तो वहां मौजूद नजारे ने आधुनिक विज्ञान की समझ को हिला कर रख दिया। चार सहस्राब्दियों से अधिक समय बीतने के बाद भी उन बर्तनों में भरा चिपचिपा और चमकदार पदार्थ बिल्कुल जस का तस सुरक्षित है।

यह खोज मेडिटेरेनियन आर्कियोलॉजी एसोसिएशन और स्थानीय विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चार महीने के जोखिम भरे अंडरवाटर अभियान के बाद पूरी की है। कार्बन डेटिंग और पुरातात्विक विश्लेषण के मुताबिक यह जहाज 'अर्ली ब्रॉन्ज एज' यानी प्रारंभिक कांस्य युग का है। इतने लंबे समय तक खारे पानी में डूबे रहने के कारण जहाज की लकड़ी तो पूरी तरह गल चुकी थी, लेकिन चट्टानों से चिपके मिट्टी के विशाल दोहरे हैंडल वाले बर्तन (एम्फोरा) और पत्थर के तीन भारी लंगर सुरक्षित बरामद कर लिए गए।

पुरातत्वविदों के मुताबिक बर्तनों के भीतर मिला यह गाढ़ा अवशेष प्राचीन काल का वह बेशकीमती सामान हो सकता है जिसकी मांग उस दौर के राजा-महाराजाओं और मिस्र के फराओ के बीच सबसे ज्यादा थी। प्राथमिक अनुमान बताते हैं कि यह उच्च गुणवत्ता वाला जैतून का तेल, पुरानी अंगूरी शराब या देवदार के पेड़ों से निकाला गया दुर्लभ रेजिन (गोंद) हो सकता है। उस दौर में इस तरह का रेजिन जहाजों को वाटरप्रूफ बनाने, शाही महलों के निर्माण और शवों को 'ममी' के रूप में सदियों तक सुरक्षित रखने के काम आता था।

ऐतिहासिक क्यों है ये खोज

ये खोज इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि जब मिस्र में गीजा के महान पिरामिड बनाए जा रहे थे, ठीक उसी दौर में यह जहाज लेवंत, सीरिया, लेबनान और जॉर्डन घाटी के समृद्ध व्यापारिक मार्गों पर तैर रहा था। माना जा रहा है कि किसी भीषण तूफान में चट्टानों से टकराकर यह जहाज जलमग्न हो गया था। यूनान के डोकोस द्वीप पर मिले 4200 साल पुराने जहाज के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए अब यह दुनिया का सबसे पुराना खोजा गया समुद्री जहाज बन गया है।

वैज्ञानिकों के लिए यह खोज किसी जैकपॉट से कम नहीं है। आधुनिक प्रयोगशालाओं में इस चिपचिपे पदार्थ के ऑर्गेनिक फॉर्मूले की गहन जांच शुरू हो चुकी है। अगर यह कुदरती प्रिजर्वेशन तकनीक डिकोड हो जाती है, तो आज की दुनिया को प्लास्टिक कचरे से मुक्ति दिलाने के लिए पूरी तरह इको-फ्रेंडली और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग का नया विकल्प मिल सकता है। साथ ही, प्राचीन चिकित्सा विज्ञान और टिकाऊ तकनीकों से जुड़े कई अहम सूत्र भी सामने आ सकते हैं।