डेढ़ साल का बच्चा नहीं कर पा रहा ये 4 काम, तुरंत डॉक्टर के पास भागे
छोटे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर माता-पिता की नजर रहना बेहद जरूरी होता है। आमतौर पर डेढ़ साल (18 महीने) की उम्र पूरी होते-होते बच्चे कई महत्वपूर्ण डेवलपमेंटल माइलस्टोन हासिल कर लेते हैं।
जाने-माने पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक ने माता-पिता को आगाह करते हुए कहा है कि अगर 18 महीने की उम्र तक बच्चा कुछ बुनियादी गतिविधियां करने में असमर्थ है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। डॉक्टर के मुताबिक ये 4 लक्षण बच्चों में विकासात्मक देरी के गंभीर रेड फ्लैग हो सकते हैं, जिन पर तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।
बिना किसी सहारे के खुद से न चल पाना
डॉ. रवि मलिक के मुताबिक, 18 महीने के बच्चे के लिए पहला बड़ा माइलस्टोन उसका स्वतंत्र रूप से चलना है। अगर आपका बच्चा डेढ़ साल का होने के बावजूद बिना किसी सहारे के खुद अपने पैरों पर नहीं चल पा रहा है या खड़े होने में लगातार संघर्ष कर रहा है, तो यह शारीरिक विकास से जुड़ा एक बड़ा रेड फ्लैग है। ऐसी स्थिति में बच्चे की हड्डियों, मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम की जांच के लिए तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।
सार्थक शब्द न बोल पाना और बातचीत न करना
डेढ़ साल की उम्र तक बच्चे अपनी बात समझाने के लिए स्पष्ट और अर्थपूर्ण शब्दों का प्रयोग करने लगते हैं। अगर बच्चा इस उम्र में भी मां को 'मम्मी' और पिता को 'पापा' जैसे बुनियादी शब्द नहीं बोल पा रहा है, तो यह चिंता का विषय है। सामान्य तौर पर 18 महीने के बच्चे 'दे दो', 'खा लो' या 'पानी पी लो' जैसे दो शब्दों को आपस में जोड़कर बोलना शुरू कर देते हैं। यदि बच्चा ऐसा करने में असमर्थ है, तो यह स्पीच डिले का संकेत हो सकता है।
साधारण निर्देशों और कमांड्स को फॉलो न करना
तीसरा अहम संकेत बच्चे की समझने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता से जुड़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 18 महीने का बच्चा रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों को आसानी से समझने लगता है। अगर आपका बच्चा 'इधर आओ', 'बैठ जाओ' या 'मुझे गेंद दे दो' जैसे बेहद सरल कमांड्स को सुनकर समझ नहीं पा रहा है या उन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है, तो बिना देर किए डॉक्टर से चेकअप करवाना जरूरी है।
आई कॉन्टैक्ट की कमी और सोशल इंटरैक्शन न होना
चौथा सबसे गंभीर संकेत बच्चे का सामाजिक व्यवहार और आई कॉन्टैक्ट है। अगर बच्चा माता-पिता या अपने उम्र के अन्य बच्चों (पीयर ग्रुप) के साथ घुलने-मिलने या खेलने में दिलचस्पी नहीं दिखाता, बुलाने पर नजरें नहीं मिलाता (आई कॉन्टैक्ट की कमी) या बिल्कुल अलग-थलग रहता है, तो यह न्यूरोलॉजिकल या ऑटिज्म स्पेक्ट्रम से जुड़ा शुरुआती लक्षण हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल किसी वरिष्ठ पीडियाट्रिशियन से मिलना चाहिए।