किस महीने में जन्मे लोगों के दिल में भरी होती है सबसे ज्यादा जलन और शंका, जानें यहां
मानव स्वभाव में ईर्ष्या और शंका का भाव एक स्वाभाविक पहलू है। हालांकि हर व्यक्ति में इन भावनाओं की तीव्रता अलग-अलग होती है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसा माना जाता है कि जन्म के महीने का सीधा असर इंसान के व्यक्तित्व उसकी प्राथमिकताओं और व्यवहार पर पड़ता है। किसी व्यक्ति में दूसरों की सफलता देखकर कैसा भाव पैदा होता है इसका आकलन यदि जन्म माह के अनुसार किया जाए तो एक दिलचस्प क्रम देखने को मिलता है।
इस महीने में जन्मे लोग होते हैं बहुत जुनूनी
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से वर्ष के अंतिम और मध्य महीनों में जन्मे कुछ लोगों में असुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मक भावना अधिक देखी जाती है।
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नवंबर: इस माह में जन्मे लोग गहरे और भावनात्मक रूप से बेहद जुनूनी होते हैं। वे हर संबंध में अधिकार भाव रखते हैं जिसके कारण उनमें शंका और ईर्ष्या की भावना सर्वाधिक देखने को मिलती है।
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सितंबर: परफेक्शन की चाहत रखने वाले ये लोग अपने लिए ऊंचे पैमाने तय करते हैं। जब कोई अन्य व्यक्ति इनसे बेहतर प्रदर्शन करता है तो वे खुद को ईर्ष्या से रोक नहीं पाते।
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अगस्त: आत्मविश्वासी और लाइमलाइट पसंद करने वाले इस माह के जातकों को अपनी जगह किसी और को मिलते देखना बिल्कुल पसंद नहीं आता। ऐसा होने पर वे क्रोधित और ईर्ष्यालु हो जाते हैं।
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अप्रैल: निडर और स्पष्टवादी स्वभाव के लोग यदि किसी से जलन महसूस भी करते हैं तो उसे बिना छिपाए सीधे सामने व्यक्त कर देते हैं।
कुछ महीनों में जन्मे लोग स्वभाव से तो शांत रहते हैं लेकिन विशेष परिस्थितियों या असुरक्षा महसूस होने पर ही उनके भीतर ईर्ष्या पनपती है।
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जून: सामाजिक और जिज्ञासु प्रवृत्ति वाले ये लोग तब तक ईर्ष्या नहीं करते जब तक कि इन्हें उपेक्षित न महसूस कराया जाए।
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अक्टूबर: संतुलन और शांति प्रिय लोग अन्याय या गलत व्यवहार होने पर ही अपने भीतर जलन की भावना महसूस करते हैं जिसे वे जाहिर नहीं होने देते।
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दिसंबर: ऊर्जावान और प्रतिस्पर्धी सोच रखने वाले ये जातक केवल तभी जलन महसूस करते हैं जब उनका तय लक्ष्य कोई उनसे पहले हासिल कर ले।
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जुलाई: अपने प्रियजनों के प्रति बेहद सुरक्षात्मक रवैया रखने वाले इन लोगों के रिश्तों के बीच यदि कोई तीसरा आता है तो वे ईर्ष्या महसूस करने लगते हैं।
ज्योतिष के अनुसार कुछ महीनों में जन्म लेने वाले लोगों में दूसरों से तुलना करने या ईर्ष्या रखने की भावना लगभग न के बराबर होती है।
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जनवरी: व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी स्वभाव के ये जातक दूसरों से तुलना करने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
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मई: धैर्यवान और वफादार स्वभाव वाले लोग तब तक सुरक्षित और सकारात्मक महसूस करते हैं जब तक उनके रिश्तों या उपलब्धियों पर कोई संकट न आए।
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फरवरी: स्वतंत्र सोच वाले और अपनी ही दुनिया में मस्त रहने वाले ये जातक दूसरों की जिंदगी में क्या चल रहा है इस पर ध्यान ही नहीं देते।
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मार्च: इस माह में जन्मे लोग सर्वाधिक दयालु संवेदनशील और रचनात्मक होते हैं। वे हर भावना को सकारात्मक रूप से लेते हैं और उनके भीतर ईर्ष्या जैसी नकारात्मकता सबसे कम होती है।