करवा चौथ पर सरगी की थाली में जरूर रखें ये 6 चीजें, दिनभर नहीं लगेगी प्यास और बनी रहेगी भरपूर एनर्जी

करवा चौथ पर सरगी की थाली में जरूर रखें ये 6 चीजें, दिनभर नहीं लगेगी प्यास और बनी रहेगी भरपूर एनर्जी

सुहागिनों के सबसे पावन पर्व करवा चौथ में 'सरगी' की परंपरा का बेहद खास और गहरा महत्व है। यह केवल भोर का एक भोजन नहीं, बल्कि सास द्वारा अपनी बहू को दिया जाने वाला अखंड सौभाग्य, स्नेह और आशीर्वाद का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का निर्जला व्रत शुरू करने से पहले महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में यानी सूर्योदय से पूर्व इस पारंपरिक भोजन को ग्रहण करती हैं। इसके बाद दिनभर अन्न और जल की एक बूंद भी ग्रहण किए बिना शाम को चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ वैज्ञानिक और स्वास्थ्य के लिहाज से भी सरगी बेहद अहम है, क्योंकि यह दिनभर चलने वाले कठिन उपवास से पहले शरीर को आवश्यक पोषण, ऊर्जा और हाइड्रेशन देने का एकमात्र जरिया होती है।

करवा चौथ की पारंपरिक और पौष्टिक सरगी थाली तैयार करते समय छह प्रमुख खाद्य पदार्थों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाता है। सबसे पहले पारंपरिक फेनी या सेवइयां होती हैं, जिन्हें दूध और मेवे के साथ मीठा पकाया जाता है; यह कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत बनती हैं। इसके साथ ही सेब, केला, अनार और पपीते जैसे ताजे मौसमी फल रखे जाते हैं, जो प्रचुर मात्रा में विटामिन्स, फाइबर और प्राकृतिक जल तत्व प्रदान कर डिहाइड्रेशन से बचाते हैं। तीसरा मुख्य हिस्सा बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता और किशमिश जैसे सूखे मेवे हैं, जिनमें मौजूद हेल्दी फैट्स और प्रोटीन दिनभर ऊर्जा के स्तर को गिरने नहीं देते। इसके अलावा थाली में स्वाद और परंपरा के रूप में पारंपरिक मठरी व नमकीन स्नैक्स रखे जाते हैं, तो वहीं जश्न और शुभता के प्रतीक के तौर पर पेड़ा, बर्फी, लड्डू या हलवे जैसी पारंपरिक मिठाइयां शामिल की जाती हैं। छठा और सबसे महत्वपूर्ण घटक नारियल और तरल पेय हैं; नारियल पानी, सादा पानी या गुनगुना दूध पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहता है, जिससे पूरे दिन प्यास, सिरदर्द और कमजोरी की समस्या नहीं सताती।

धार्मिक नियमों के मुताबिक, सरगी का सेवन हमेशा सूर्योदय से पहले ही पूरा कर लेना चाहिए, क्योंकि सूरज की पहली किरण निकलने के साथ ही निर्जला उपवास का संकल्प शुरू हो जाता है। पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तली-भुनी चीजों या अत्यधिक मीठे पर निर्भर रहने के बजाय सरगी की थाली को बैलेंस्ड रखना चाहिए, ताकि दिन में अचानक ब्लड शुगर स्पाइक होकर थकान न महसूस हो। जिन महिलाओं को कोई पुरानी बीमारी है, डायबिटीज है, नियमित दवाएं ले रही हैं या जो गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं हैं, उन्हें निर्जला उपवास रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। कुल मिलाकर, करवा चौथ की सरगी परंपरा, परिवार के रिश्तों की मिठास और सेहत की सुरक्षा का एक अद्भुत संगम है, जो व्रत को आस्था के साथ-साथ स्वस्थ रूप से पूरा करने की शक्ति देता है।