दूध बार-बार उफनकर गैस पर गिरता है, ये 5 देसी नुस्खे कर देंगे झंझट खत्म
रसोई में काम करते समय दूध का उफनकर गैस चूल्हे पर गिर जाना एक आम समस्या है। नजर हटते ही दूध बर्तन से बाहर आ जाता है, जिससे न सिर्फ दूध बर्बाद होता है बल्कि गैस स्टोव और किचन प्लेटफॉर्म की सफाई का झंझट भी बढ़ जाता है। बार-बार चूल्हे के पास खड़े रहने की थकान से बचने और इस परेशानी को हमेशा के लिए दूर करने के लिए कुछ बेहद कारगर और आसान घरेलू नुस्खे अपनाए जा सकते हैं।
बर्तन के ऊपर रखें लकड़ी का चम्मच या कलछी
दूध चढ़ाते समय बर्तन के मुंह पर एक बड़ी लकड़ी की कलछी या लकड़ी का चम्मच आड़ा रख दें। जैसे ही दूध उबलकर ऊपर की ओर उठता है और लकड़ी के संपर्क में आता है, बुलबुले ठंडे होकर तुरंत नीचे बैठ जाते हैं। लकड़ी ऊष्मा की कुचालक होती है, जिससे दूध के झाग का तापमान टूट जाता है और वह बर्तन से बाहर नहीं फैलता।
बर्तन के भीतरी किनारों पर लगाएं घी या मक्खन
दूध को गर्म करने के लिए रखने से पहले बर्तन के ऊपरी अंदरूनी किनारों पर थोड़ा सा देसी घी या मक्खन लगा दें। चिकनाई की परत बनने से दूध के झाग और बुलबुले ऊपर की तरफ टिक नहीं पाते और बर्तन के अंदर ही सीमित रहते हैं। यह तरीका दूध को किनारों से ऊपर चढ़ने से रोकने में काफी मददगार साबित होता है।
दूध के बर्तन में रख दें छोटी कटोरी
दूध उबालने से पहले बर्तन की तली में एक छोटी साफ स्टील या कांच की कटोरी डाल दें। जब आंच पर दूध गर्म होना शुरू होता है, तो कटोरी की उपस्थिति से तलहटी में लगातार कंपन और हलचल बनी रहती है। इससे बनने वाले भाप के बुलबुले सतह पर पहुंचकर फूटते रहते हैं और दूध अचानक ऊपर उफनकर बाहर नहीं आता।
उफान आते ही मारें ठंडे पानी के छींटे
यदि दूध बर्तन के ऊपरी सिरे तक पहुंच गया है और उफनने ही वाला है, तो तुरंत एक चम्मच से साफ पानी के हल्के छींटे उसके ऊपर मार दें। तापमान में अचानक आए इस हल्के बदलाव से झाग तुरंत दब जाता है और उबलता हुआ दूध तुरंत नीचे बैठ जाता है।
धीमी और मध्यम आंच पर पकाने की आदत
तेज आंच पर दूध पकाने से सतह पर तेजी से मलाई की परत बनती है जिसके नीचे भाप जमा होकर जोरदार उफान लाती है। दूध को हमेशा धीमी या मध्यम आंच पर ही उबालना चाहिए। बीच-बीच में दूध को चम्मच से चलाते रहने से भी मलाई का दबाव नहीं बनता और दूध बिना गिरे अच्छी तरह उबल जाता है।