एक बार भरोसा टूटा तो जिंदगी भर नहीं करते माफ, जानिए किन 2 तारीखों में जन्मे लोग दिल में दबा लेते हैं कड़वाहट

एक बार भरोसा टूटा तो जिंदगी भर नहीं करते माफ, जानिए किन 2 तारीखों में जन्मे लोग दिल में दबा लेते हैं कड़वाहट

किसी भी मानवीय रिश्ते की नींव भरोसे और सच्चाई की डोर पर टिकी होती है। जहां कुछ लोग जीवन के कड़वे अनुभवों को भूलकर आगे बढ़ जाते हैं, वहीं कुछ लोग किसी के कहे शब्द या धोखे को ताउम्र दिल में संजोए रखते हैं। अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) के अनुसार, मूलांक 4 और 8 वाले जातकों का व्यक्तित्व ठीक ऐसा ही माना जाता है। दोस्ती हो या प्रेम प्रसंग, ये दोनों मूलांक अपने साथी से अटूट निष्ठा और ईमानदारी की उम्मीद रखते हैं। अगर एक बार इनका विश्वास टूट जाए, तो उस रिश्ते में पहले जैसी गर्माहट और अपनापन लौटाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

अंक ज्योतिष के सिद्धांतों के मुताबिक, किसी भी माह की 4, 13, 22 या 31 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 4 होता है, जिसका प्रतिनिधित्व रहस्यमयी ग्रह राहु करता है। वहीं, महीने की 8, 17 और 26 तारीख को जन्म लेने वाले लोग मूलांक 8 के अंतर्गत आते हैं, जिसके स्वामी न्याय और कर्मफल के देवता शनि देव हैं। दोनों ही मूलांक वाले जातकों की नजर आसपास की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर बेहद बारीक होती है। ये किसी के सामने अपनी भावनाएं आसानी से जाहिर नहीं करते, लेकिन सामने वाले के हाव-भाव और कथनी-करनी के अंतर को पलक झपकते भांप लेते हैं।

मूलांक 4 के जातक राहु के प्रभाव के चलते लीक से हटकर सोचने वाले होते हैं। इनके साथ यदि कोई गलत व्यवहार करे, तो उस आघात को भूलना इनके लिए बेहद जटिल होता है। ये अपना दुखड़ा रोने के बजाय बातों को दिल में दबाकर रखते हैं। वहीं मूलांक 8 वाले जातक शनि के प्रभाव से बेहद गंभीर, परिपक्व और न्यायप्रिय स्वभाव के होते हैं। वे मीठी बातों के बजाय सामने वाले के आचरण को तवज्जो देते हैं। यदि कोई बार-बार इनकी भावनाओं का अनादर करे या झूठ बोले, तो ये बिना किसी हंगामे के चुपचाप उस रिश्ते से हमेशा के लिए किनारा कर लेते हैं।

ज्योतिष शास्त्रियों का मानना है कि पुराने कटु अनुभवों को लंबे समय तक याद रखने की यह आदत इन्हें दोबारा भावनात्मक चोट लगने से तो बचाती है, लेकिन कई बार नए और अच्छे रिश्तों के दरवाजे भी बंद कर देती है। इसलिए मूलांक 4 और 8 के जातकों को अपनी दबी हुई भावनाओं को साझा करने, ध्यान (मेडिटेशन) लगाने और हर व्यक्ति को पुराने घावों के तराजू पर तौलने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि सामने वाला अपनी गलती का सच्चा पश्चाताप करे, तो उसे सुधरने का अवसर देकर रिश्ते को टूटने से बचाया जा सकता है।