दिवाली के ठीक बाद तेजी से फैलती हैं ये बीमारियां! कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये भारी गलती
दीपावली के उल्लास के बाद कई शहरों की आबोहवा अचानक दमघोंटू हो जाती है। पटाखों से निकलने वाले घने धुएं, रासायनिक गैसों और हवा में तैरते बारीक धूल-कणों के चलते एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) तेजी से गिरता है। इसका सीधा असर सांस की नलियों, फेफड़ों, आंखों और त्वचा पर पड़ता है। वायु प्रदूषण का यह दुष्प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर सबसे अधिक देखा जाता है, वहीं स्वस्थ युवा भी सिरदर्द, गले में खराश और आंखों में जलन की शिकायत लेकर अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। ऐसे नाजुक माहौल में त्योहार के ठीक बाद अपनी दिनचर्या और सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।
हवा में घुले अतिसूक्ष्म प्रदूषक कण PM2.5 और PM10 सांस के जरिए सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं। इसके चलते सूखी खांसी, गले में चुभन, सीने में भारीपन और सांस लेने में कठिनाई जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। विशेष रूप से अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के मरीजों की स्थिति स्मॉग के संपर्क में आने से बिगड़ सकती है। ऐसे मरीजों को अपनी नियमित दवाएं और इनहेलर हमेशा साथ रखना चाहिए और डॉक्टर के परामर्श के बिना खुराक में बदलाव नहीं करना चाहिए। अत्यधिक प्रदूषण वाले घंटों, खासकर सुबह की सैर और देर शाम, खुले में जाने से बचें और बाहर निकलना अनिवार्य हो तो केवल अच्छी फिटिंग वाले N95 मास्क का ही इस्तेमाल करें।
पटाखों के विषैले धुएं का असर आंखों और त्वचा पर भी तुरंत दिखाई देता है। हवा में मौजूद सल्फर और अन्य रसायनों के कारण आंखों में लगातार जलन, पानी आना, लालिमा और असहनीय खुजली की समस्या बढ़ जाती है, जबकि संवेदनशील त्वचा पर रैशेज और लाल चकत्ते उभर आते हैं। आंखों को संक्रमण और रगड़ से बचाने के लिए उन्हें बार-बार उंगलियों से छूने से बचें। घर लौटने पर चेहरे और आंखों को ताजे, साफ पानी से अच्छी तरह धोएं तथा आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर द्वारा सुझाए गए लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का उपयोग करें। यदि आंखों में लगातार तेज दर्द, धुंधलापन या सूजन बनी रहे तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।
प्रदूषण केवल सांस और आंखों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दिल और तंत्रिका तंत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। हवा में तैरते बारीक विषाक्त कण रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों के लिए दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है। प्रदूषण बढ़ने पर लोगों में सिरदर्द, चक्कर आना, भारी थकान और घबराहट जैसी शिकायतें भी तेजी से बढ़ती हैं। इससे बचाव के लिए खुद को हाइड्रेटेड रखें, घर के भीतर खिड़कियां बंद रखकर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और भारी आउटडोर एक्सरसाइज से बचें। यदि सीने में बेचैनी, तेज दर्द या सांस लेने में गंभीर रुकावट महसूस हो, तो बिना समय गंवाए नजदीकी आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें।