14 फुटबॉल मैदान के बराबर है भारत का ये प्लेटफॉर्म, गोरखपुर का रिकॉर्ड टूटा
भारतीय रेलवे का नेटवर्क न केवल दुनिया के सबसे बड़े रेल तंत्रों में शुमार है, बल्कि इसके कई स्टेशन अपने अनोखे रिकॉर्ड्स और ऐतिहासिक धरोहर के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं।
विदेशी सैलानी भी जब भारतीय रेलवे के इन अजूबों को देखते हैं, तो दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। ऐसा ही एक अविश्वसनीय कीर्तिमान कर्नाटक के एक रेलवे स्टेशन के नाम दर्ज है, जिसका प्लेटफॉर्म इतना विशाल है कि उस पर एक साथ फुटबॉल के 14 से 15 मैदान आसानी से समा सकते हैं। अपनी इस बेमिसाल लंबाई के चलते इस स्टेशन का नाम बाकायदा 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में दर्ज हो चुका है।
गोरखपुर को पीछे छोड़ बना दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म
कर्नाटक राज्य में स्थित 'श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली जंक्शन' का प्लेटफॉर्म नंबर 8 वर्तमान में भारत ही नहीं बल्कि समूचे विश्व का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म है। इस प्लेटफॉर्म की कुल लंबाई 1,507 मीटर (लगभग 1.5 किलोमीटर) है। साल 2023 में इसका आधिकारिक उद्घाटन किया गया था, जिसके साथ ही इसने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन (1,366.33 मीटर) के वर्षों पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया। इस स्टेशन का नामकरण प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी के सम्मान में किया गया है और यह दक्षिण पश्चिम रेलवे ज़ोन का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त जंक्शन माना जाता है।
क्या सचमुच इसमें फुटबॉल के 14 मैदान आ सकते हैं?
अक्सर जब लोग 1507 मीटर लंबे प्लेटफॉर्म के बारे में सुनते हैं, तो उन्हें यह जानकर हैरानी होती है कि क्या वास्तव में इस पर 14 फुटबॉल ग्राउंड बनाए जा सकते हैं? अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार एक मानक फुटबॉल मैदान की लंबाई लगभग 105 मीटर होती है। गणितीय दृष्टि से देखें तो 1507 मीटर के इस प्लेटफॉर्म पर लगभग 14.35 यानी 14 से ज्यादा फुटबॉल मैदान एक कतार में पूरी तरह फिट बैठ सकते हैं। यह विशाल संरचना स्टेशन पर एक साथ दो लंबी ट्रेनों को आगे-पीछे खड़े करने और यात्रियों को सुगम आवाजाही देने में सक्षम है।
आउटर पर लगने वाले जाम से मुक्ति के लिए हुआ था निर्माण
हुबली जंक्शन दक्षिण भारत का एक प्रमुख रेलवे केंद्र है, जहां चारों दिशाओं (उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम) से आने-जाने वाली ट्रेनों का बड़ा संगम होता है। पहले पुराने बुनियादी ढांचे और सीमित प्लेटफॉर्म्स के कारण ट्रेनों को आउटर सिग्नलों पर घंटों खड़ा रहना पड़ता था, जिससे यात्रियों को भारी देरी और असुविधा झेलनी पड़ती थी। ट्रेनों की लेटलतीफी दूर करने, यार्ड रीमॉडलिंग करने और एक साथ कई ट्रेनों के सुरक्षित व सुचारू संचालन के उद्देश्य से रेलवे ने इस विशालकाय प्लेटफॉर्म के निर्माण का निर्णय लिया।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक मुहर
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने 12 जनवरी 2023 को इस प्लेटफॉर्म की लंबाई का आधिकारिक सत्यापन करते हुए इसे 'दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म' घोषित किया। गिनीज रिकॉर्ड के अनुसार, दक्षिण पश्चिम रेलवे के हुबली मंडल द्वारा हुबली यार्ड के आधुनिकीकरण और पुनर्विकास परियोजना के तहत इसे तैयार किया गया था। इसका मुख्य मकसद ट्रेन परिचालन दक्षता को बढ़ाना, सिग्नलिंग सुरक्षा को सुदृढ़ करना और यात्रियों को बिना भीड़भाड़ के आधुनिक और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करना था।