BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर अश्विन के तीखे सवाल, बोले- खिलाड़ियों को बेवजह रोका जा रहा

BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर अश्विन के तीखे सवाल, बोले- खिलाड़ियों को बेवजह रोका जा रहा

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (पूर्व में नेशनल क्रिकेट एकेडमी - NCA) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।

अपने यूट्यूब चैनल पर खुलकर बात करते हुए अश्विन ने कहा कि खिलाड़ियों को चोट के रिहैब के नाम पर बेवजह लंबे समय तक सेंटर में रोका जा रहा है, जिससे उनकी फिटनेस, मानसिक स्थिति और ऑन-फील्ड प्रदर्शन पर सीधा नकारात्मक असर पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने आधुनिक ट्रेनिंग रूटीन, वर्कलोड और चोट प्रबंधन को लेकर बोर्ड को स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की सलाह दी।

तीनों फॉर्मेट के लिए अलग टीमों का वक्त, वरुण चक्रवर्ती पर बड़ा खुलासा

अश्विन ने आधुनिक क्रिकेट के वर्कलोड पर जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब भारतीय क्रिकेट को तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और टी20) के लिए अलग-अलग टीमें तैयार करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि केवल एक या दो असाधारण खिलाड़ियों को ही दो या तीनों फॉर्मेट में शामिल किया जाए। खिलाड़ियों के इंजरी मैनेजमेंट की जवाबदेही तय करने की मांग उठाते हुए अश्विन ने वरुण चक्रवर्ती का उदाहरण दिया। अश्विन ने खुलासा किया कि वरुण चक्रवर्ती को महज एक महीने में रिहैब पूरा करके मैदान पर लौट आना चाहिए था, लेकिन उन्हें 3 से 4 महीने तक सेंटर में रखा गया। यहां तक कि जब तमिलनाडु प्रीमियर लीग (TNPL) में उनके खेलने की अनुमति मांगी गई, तो उन्हें घरेलू लीग में खेलने तक की मंजूरी नहीं दी गई।

बुमराह के बाहर होने और कम्युनिकेशन गैप पर भी उठे सवाल

बीसीसीआई का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस हाल के दिनों में कई फैसलों को लेकर लगातार विवादों के घेरे में रहा है। पीटीआई (PTI) की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्पोर्ट्स साइंस विंग, मेडिकल टीम और सीनियर नेशनल चयन समिति के बीच तालमेल और संवाद की भारी कमी है। इसका बड़ा उदाहरण श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान देखने को मिला, जब तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चयन के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। रिपोर्ट के मुताबिक पहले चयन समिति को भरोसा दिलाया गया था कि बुमराह पूरी तरह फिट हो जाएंगे, लेकिन अंतिम समय पर मेडिकल टीम ने उन्हें अनफिट करार दे दिया, जिससे चयनकर्ताओं की योजनाएं लड़खड़ा गईं।