भारत में घूमना हुआ अमीरों का शौक; 9 दिन के ट्रिप पर उड़े 2.4 लाख, बिल देख इंटरनेट पर मचा बवाल
भारत के भीतर छुट्टियां मनाना अब आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने लगा है। घरेलू पर्यटन की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। यह चर्चा तब शुरू हुई जब सूरज कुमार तलरेजा नाम के एक पर्यटक ने इंटरनेट पर अपने 9 दिन के फैमिली वेकेशन का चौंकाने वाला बजट साझा किया। चार सदस्यों वाले परिवार के इस घरेलू सफर पर करीब 2.4 लाख रुपये का भारी-भरकम खर्च आया। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के भीतर ही घूमना इतना खर्चीला हो चुका है, तो थोड़ा अतिरिक्त बजट जोड़कर थाईलैंड या मलेशिया जैसे खूबसूरत अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन्स पर कहीं बेहतर सुविधाएं हासिल की जा सकती हैं। उनका यह अनुभव सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी सहमति जताते हुए घरेलू पर्यटन के महंगे होने पर चिंता जाहिर की।
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने हैंडल से यह अनुभव साझा करते हुए सूरज कुमार तलरेजा ने साफ किया कि 9 दिनों के इस सफर में परिवार 3 से 5 सितारा होटलों में ठहरा था। पूरे सफर के लिए प्राइवेट कैब बुक की गई थी और इलाके के सभी प्रमुख दर्शनीय स्थलों का दौरा किया गया था। उन्होंने लिखा कि भारत के भीतर सफर करना अब आम बजट से बाहर होता जा रहा है। अगर वे अपने बजट में महज 60 हजार रुपये और जोड़ देते, तो लगभग 3 लाख रुपये में पूरा परिवार दक्षिण-पूर्व एशिया के थाईलैंड या मलेशिया जैसे देशों में फाइव स्टार स्तर की अंतरराष्ट्रीय छुट्टियों का आनंद उठा सकता था। हालांकि उन्होंने ट्रिप की सटीक लोकेशन का खुलासा नहीं किया, लेकिन उनका यह गणित लोगों को सोचने पर मजबूर कर गया।
पोस्ट वायरल होते ही इंटरनेट यूजर्स ने अपनी-अपनी यात्राओं के बिल और अनुभव साझा करने शुरू कर दिए। कई पर्यटकों ने तुलना करते हुए बताया कि कैसे विदेशी धरती पर घूमना भारत के मुकाबले ज्यादा किफायती साबित हुआ। एक यूजर ने लिखा कि एक वयस्क और छोटे बच्चे के साथ मलेशिया की यात्रा भारतीय ट्रिप से काफी सस्ती पड़ी। वहीं दूसरे यूजर का कहना था कि ढाई लाख रुपये के बजट में पीक सीजन के दौरान भी 4 वयस्क और 2 बच्चे थाईलैंड में 7 दिनों तक शानदार वेकेशन मना सकते हैं। वियतनाम, बाली, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों को पर्यटकों ने वैल्यू फॉर मनी करार दिया। एक पर्यटक ने अपना ताजा अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह परिवार के तीन सदस्यों के साथ वियतनाम के दा नांग में 11 दिन रहकर आए, जहां सी-व्यू फाइव स्टार होटल में ठहरने के बावजूद कुल बिल केवल 2.2 लाख रुपये बैठा।
असली समस्या 'वैल्यू फॉर मनी' की कमी
बहस के बीच लोगों ने यह भी माना कि घरेलू पर्यटन को बढ़ावा मिलना चाहिए क्योंकि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और छोटे व्यापारियों को सहारा मिलता है। लेकिन असली समस्या 'वैल्यू फॉर मनी' की कमी है। पर्यटकों का कहना है कि जब लोग भारी कीमत चुकाते हैं, तो वे बेहतर साफ-सफाई, विश्वस्तरीय सर्विस और यादगार अनुभव की उम्मीद करते हैं, जो अक्सर देश के कई पर्यटन स्थलों पर नदारद रहता है। इसी वजह से पर्यटक विदेशी विकल्पों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इससे पहले भी ऋषिकेश में होटलों के भारी-भरकम किराए से परेशान होकर श्रीलंका का रुख करने वाले एक पर्यटक की कहानी सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हुई थी।