गर्दन और पीठ दर्द से हैं परेशान, कहीं आपकी ये 5 रोजमर्रा की आदतें तो नहीं बन रहीं बड़ी वजह

गर्दन और पीठ दर्द से हैं परेशान, कहीं आपकी ये 5 रोजमर्रा की आदतें तो नहीं बन रहीं बड़ी वजह

डिजिटल दौर में घंटों मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करने, लैपटॉप और कंप्यूटर पर लगातार झुककर काम करने से गर्दन और पीठ में जकड़न व दर्द की समस्या आम हो चुकी है। हालांकि, केवल स्क्रीन टाइम ही नहीं बल्कि दिनचर्या से जुड़ी कुछ अनदेखी आदतें भी इस दर्द को ट्रिगर कर रीढ़ की हड्डी को कमजोर बना रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय रहते इन गलत आदतों में सुधार न किया जाए तो यह सामान्य दर्द आगे चलकर गंभीर सर्वाइकल या स्पाइनल इंजरी का रूप ले सकता है।

लंबे समय तक डेस्क पर एक ही पोजीशन में बैठना

ऑफिस हो या वर्क फ्रॉम होम, लंबे समय तक लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले लोगों में पीठ और गर्दन के दर्द की शिकायत सबसे ज्यादा देखी जाती है। घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी पर अप्राकृतिक दबाव लगातार बना रहता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और रीढ़ की नसों व मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है।

फिजिकल एक्टिविटी और एक्सरसाइज से दूरी

शारीरिक रूप से सक्रिय न रहने और नियमित व्यायाम न करने से शरीर का मस्कुलर सपोर्ट कमजोर पड़ने लगता है। वर्कआउट न करने से रीढ़ की हड्डी को सहारा देने वाली मांसपेशियों की सहनशक्ति और ताकत धीरे-धीरे घटने लगती है, जिसका सीधा असर रीढ़ के प्राकृतिक अलाइनमेंट पर पड़ता है और अचानक झुकने या वजन उठाने पर चोट लगने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

पोषक तत्वों का अभाव और जंक फूड का अधिक सेवन

हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए सही पोषण बेहद जरूरी है। शरीर में विटामिन डी3 और विटामिन बी12 की कमी, खून में यूरिक एसिड का बढ़ना और नियमित रूप से फास्ट फूड या जंक फूड का सेवन हड्डियों के घनत्व को घटा देता है। पोषण की इस गंभीर कमी से स्पाइनल कॉलम कमजोर होता है और जोड़ों में सूजन व दर्द उभरने लगता है।

नींद की कमी से मांसपेशियों में रिकवरी की बाधा

गहरी नींद प्राकृतिक रूप से पूरे शरीर और मांसपेशियों की रिपेयरिंग का काम करती है। अगर रोजाना पर्याप्त नींद नहीं ली जाए तो रीढ़ की हड्डी और आसपास के ऊतकों को दिन भर के खिंचाव और थकान से उबरने का मौका नहीं मिल पाता। लंबे समय तक नींद पूरी न होने का सीधा नकारात्मक असर गर्दन, कंधों और कमर के ऊपरी हिस्से पर दिखाई देने लगता है।

मोबाइल देखते समय गर्दन को आगे झुकाकर रखना

स्मार्टफोन का अनियंत्रित उपयोग गर्दन और पीठ दर्द का एक बड़ा मुख्य कारण बन चुका है। मोबाइल स्क्रीन पर देखते समय सिर और गर्दन लगातार आगे की ओर झुकी रहती है, जिसे टेक्स्ट नेक सिंड्रोम भी कहा जाता है। यह झुकी हुई स्थिति सर्वाइकल स्पाइन पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव डालती है, जिससे गर्दन की रीढ़ की हड्डी को गहरा नुकसान पहुंचता है।