सुबह पेट साफ न होने से हैं परेशान, डॉक्टर ने बताया कब्ज दूर करने का अचूक फॉर्मूला
सुबह उठते ही पेट खुलकर साफ न होना, मल त्यागते समय असहजता महसूस होना या बहुत ज्यादा जोर लगाना क्रोनिक कब्ज (Constipation) के सीधे संकेत हो सकते हैं। खराब खानपान और बिगड़ी लाइफस्टाइल के चलते आज हर दूसरा व्यक्ति इस समस्या से जूझ रहा है। कई लोग पेट साफ करने के लिए तरह-तरह के चूर्ण, सिरप और दवाओं पर निर्भर हो जाते हैं, लेकिन दवा बंद होते ही परेशानी जस की तस लौट आती है। इस गंभीर समस्या से बिना दवाओं के प्राकृतिक तरीके से कैसे निजात पाएं, इसको लेकर फोर्टिस अस्पताल, मानेसर के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी सलाहकार ने जरूरी मेडिकल सलाह साझा की है।
विशेषज्ञ के मुताबिक, कब्ज की मुख्य जड़ हमारी दैनिक आदतों में छिपी होती है। डाइट में डाइटरी फाइबर की भारी कमी, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, घंटों एक जगह बैठे रहना यानी फिजिकल एक्टिविटी न होना और सोने-जागने का बिगड़ा शेड्यूल इसके सबसे बड़े ट्रिगर हैं। जब शरीर में पानी और रफेज की कमी होती है, तो आंतें मल से अतिरिक्त नमी सोख लेती हैं, जिससे मल सख्त और सूखा हो जाता है।
पेट साफ नहीं होता ऐसे समस्या को करें दूर
डॉक्टर के अनुसार सुबह पेट को बिना परेशानी पूरी तरह साफ करने के लिए एक तय मॉर्निंग रूटीन बनाना सबसे असरदार उपाय है। सुबह बिस्तर छोड़ते ही सबसे पहले गुनगुना पानी पीने की आदत डालें। इसके बाद हल्का नाश्ता करने के तुरंत बाद टॉयलेट जाने की आदत विकसित करें। दरअसल, भोजन करने के तुरंत बाद पेट में गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स एक्टिव होता है, जिससे आंतों की स्वाभाविक गति (पेरिस्टालसिस) तेज हो जाती है और पेट आसानी से साफ हो जाता है। इसके अलावा कभी भी मल त्याग की प्राकृतिक इच्छा को रोकना नहीं चाहिए और शौच के दौरान टॉयलेट सीट पर बैठकर बहुत अधिक जोर लगाने से बचना चाहिए।
आंतों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपनी थाली में बदलाव करना सबसे जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कब्ज से पीड़ित लोगों को पपीता, अमरूद, हरी पत्तेदार सब्जियां, छिलके वाली दालें, ओट्स और साबुत अनाज जैसे हाई-फाइबर फूड्स को नियमित आहार का हिस्सा बनाना चाहिए। ये फाइबर मल में पानी को बांधकर उसे नरम बनाए रखते हैं। इसके साथ ही पर्याप्त हाइड्रेशन बनाए रखें और रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तेज गति से पैदल चलने की आदत डालें, जिससे आंतों की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं।
कब्ज को केवल लाइफस्टाइल प्रॉब्लम मानकर नजरअंदाज करना भी खतरनाक हो सकता है। अगर घरेलू उपाय और डाइट में बदलाव के बाद भी समस्या लगातार बनी रहे, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए। खासकर मल के साथ खून आना, पेट में असहनीय दर्द, बार-बार उल्टी होना, या पेट में भारी सूजन के साथ गैस और मल पूरी तरह बंद हो जाना खतरे के संकेत हैं। हर व्यक्ति के पाचन तंत्र की गति अलग हो सकती है, इसलिए दिन में कितनी बार जा रहे हैं इससे ज्यादा यह मायने रखता है कि प्रक्रिया बिना दर्द और बिना खिंचाव के पूरी हो।