धनतेरस पर 13 गुना बढ़ेगी दौलत; खरीदारी का सबसे दुर्लभ महामुहूर्त, इस 1 घंटे में पूजा करते ही होगी धनवर्षा

धनतेरस पर 13 गुना बढ़ेगी दौलत; खरीदारी का सबसे दुर्लभ महामुहूर्त, इस 1 घंटे में पूजा करते ही होगी धनवर्षा

दीपावली के महापर्व की शुरुआत का प्रतीक माना जाने वाला पावन त्योहार धनतेरस हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। दिवाली से ठीक दो दिन पहले आने वाले इस पर्व पर धन के देवता कुबेर, समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी और आरोग्य के प्रदाता भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनत्रयोदशी अथवा धन्वंतरि जयंती के इस पावन अवसर पर सोना, चांदी, बर्तन, वाहन और नई परिसंपत्तियों की खरीदारी करने से उसमें तेरह गुना वृद्धि होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।

पंचांग गणना के मुताबिक, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर होगा। शास्त्रों में उदया तिथि और प्रदोष काल के संयोग को प्रधानता दी जाती है, इसलिए धनतेरस का महापर्व 6 नवंबर 2026 को ही पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा।

धनतेरस की शाम को लक्ष्मी-कुबेर और धन्वंतरि पूजन के लिए सबसे श्रेष्ठ 'धनतेरस पूजा मुहूर्त' शाम 06 बजकर 02 मिनट से रात 07 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। इस दौरान प्रदोष काल शाम 05 बजकर 33 मिनट से रात 08 बजकर 09 मिनट तक और स्थिर लग्न वृषभ काल शाम 06 बजकर 02 मिनट से 07 बजकर 57 मिनट तक विद्यमान रहेगा, जिसमें की गई पूजा स्थायी समृद्धि प्रदान करती है।

धनतेरस पर सोना, चांदी, आभूषण और बर्तनों की खरीदारी के लिए महामुहूर्त 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह 06 बजकर 37 मिनट तक रहेगा, जिसमें भक्त अपनी सुविधानुसार खरीदारी कर सकते हैं। इसके अलावा 6 नवंबर को दिनभर के चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। सुबह 06:32 से 07:54 तक चर, सुबह 07:54 से 09:16 तक लाभ और सुबह 09:16 से 10:38 तक अमृत का चौघड़िया रहेगा। इसके बाद दोपहर 12:01 से 01:23 तक शुभ चौघड़िया रहेगा, जबकि शाम को 04:07 से 05:30 तक चर चौघड़िया खरीदारी व नए सामान के गृह प्रवेश के लिए विशेष फलदायी रहेगा।