Weird Ritual: मौत के बाद भी यहां नहीं मिलता 'आराम'! हर 5 साल में खोदी जाती है अपनों की कब्र; कंकाल को बाहर निकाल नाचते-गाते हैं लोग!
दुनिया भर में अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों में अंतिम संस्कार के अपने-अपने अनोखे नियम और रिवाज हैं। कहीं शवों को दफनाया जाता है, तो कहीं दाह-संस्कार किया जाता है। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी इंसान की मौत और उसे दफनाए जाने के सालों बाद भी उसे कब्र में सुकून न मिले? और हर कुछ सालों में उसे कब्र से बाहर निकालकर उसके कंकाल के साथ उत्सव मनाया जाए?
जी हां, दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, लोग हर 5 साल में अपने पूर्वजों की कब्र खोदते हैं, उनके कंकाल (शवों) को बाहर निकालते हैं, उन्हें नए कपड़े पहनाते हैं और फिर उनके साथ नाचते-गाते हुए जश्न मनाते हैं।
मेडागास्कर की अनोखी परंपरा: 'फामादिहाना' (Famadihana)
इस बेहद अजीबोगरीब और रोंगटे खड़े कर देने वाली प्रथा का नाम 'फामादिहाना' (Famadihana) है, जिसे 'टर्निंग ऑफ द बोन्स' (Turning of the Bones) यानी हड्डियों को पलटना भी कहा जाता है।
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कहाँ मनाई जाती है यह प्रथा: यह अनोखा रिवाज पूर्वी अफ्रीका के तट के पास स्थित द्वीप देश मेडागास्कर (Madagascar) के पहाड़ों में रहने वाले 'मरीना' (Merina) समुदाय के लोगों द्वारा मनाया जाता है।
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पूर्वजों से गहरा लगाव: इस समुदाय के लोगों का मानना है कि जब तक मृत व्यक्ति का शरीर पूरी तरह से गलकर मिट्टी में नहीं मिल जाता, तब तक उसकी आत्मा पूरी तरह से परलोक नहीं जाती। वे मानते हैं कि उनके मृत पूर्वज अभी भी उनके आसपास मौजूद हैं और परिवार का हिस्सा हैं।
कब्र खोदकर कंकालों को नए सिल्क के कपड़ों में लपेटा जाता है
हर पांच से सात साल के अंतराल पर आयोजित होने वाले इस उत्सव में पूरे गांव के लोग इकट्ठा होते हैं।
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कब्र से शव निकालना: परिवार के लोग गाजे-बाजे के साथ अपने पूर्वजों की कब्र पर जाते हैं और मिट्टी खोदकर शवों या कंकालों को बाहर निकालते हैं।
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नए सिल्क के कपड़े: कब्र से बाहर निकालने के बाद, पुरानी चटाई या कफन को हटा दिया जाता है और कंकाल को बेहद महंगे, नए रेशमी (Silk) कपड़ों में लपेटा जाता है।
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कंधे पर उठाकर नृत्य: इसके बाद, परिवार के सदस्य अपने पूर्वजों के कंकालों को अपने कंधों पर उठाते हैं और लाइव म्यूजिक, ड्रम और गानों की थाप पर उनके साथ नाचते हैं। इस दौरान पूरे परिवार में रोने के बजाय बेहद खुशी और उत्सव का माहौल होता है।
इस उत्सव के दौरान रोने पर होती है सख्त मनाही
मरीना समुदाय की परंपरा के अनुसार, इस पूरे जश्न के दौरान किसी भी व्यक्ति को रोने या शोक मनाने की सख्त मनाही होती है। लोगों का मानना है कि रोने से पूर्वजों की आत्मा को दुख पहुंचेगा और वे नाराज हो जाएंगे।
कंकालों के साथ नाचने-गाने और उनके ऊपर इत्र छिड़कने के बाद, उन्हें वापस बड़ी ही श्रद्धा के साथ कब्र में दफन कर दिया जाता है। इस अनोखे और खर्चीले उत्सव के आयोजन के पीछे का मुख्य उद्देश्य पूर्वजों के प्रति अपना प्यार दिखाना और परिवार की नई पीढ़ियों को उनके पुरखों से रूबरू कराना है।