सहजन को संस्कृत में क्या कहते हैं, जानें मोरिंगा के 8 प्राचीन नाम और उनके पीछे छिपे चौंकाने वाले रहस्य
सब्जी मंडी और बाजारों में आसानी से उपलब्ध होने वाली हरी-भरी सब्जियों के फायदों से अमूमन हर कोई वाकिफ होता है। मगर कई औषधीय वनस्पतियां ऐसी भी हैं जिनकी असाधारण खूबियों और प्राचीन पहचान से आज की पीढ़ी पूरी तरह अनजान है।
ऐसा ही एक चमत्कारी सुपरफूड है मोरिंगा, जिसे उत्तर भारत और हिंदी पट्टी में सहजन की फली और अंग्रेजी में ड्रमस्टिक के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद और प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति में मोरिंगा को अमृततुल्य माना गया है। आम बोलचाल में इसे सहजन कहने वाले ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि देवभाषा संस्कृत में इसे किन नामों से पुकारा जाता है और हर नाम के पीछे सेहत का कौन सा गहरा विज्ञान छिपा है।
मोरिंगा के प्रमुख संस्कृत नाम: शिग्रु से लेकर अक्षीब तक
संस्कृत साहित्य और पारंपरिक आयुर्वेदिक संहिताओं में मोरिंगा को मुख्य रूप से 'शिग्रु' और 'शोभांजन' कहा गया है। हालांकि, संस्कृत शब्दकोश और वनौषधि ग्रंथों में इसके औषधीय गुणों के आधार पर कई अन्य विशिष्ट नाम दर्ज हैं, जिनमें प्रमुख हैं-
कृष्णगन्धा
तीक्ष्णगन्धा
रुचिरञ्जन
विद्रधिनाशन
मूलकपर्णी
नीलशिग्रु
अक्षीब
कटुकन्द
इसके अलावा भी विभिन्न शास्त्रीय निघंटुओं में मोरिंगा के स्वरूप और प्रभाव के अनुसार कई अन्य नाम मिलते हैं।
संस्कृत नामों के पीछे का रहस्य: क्यों मिला 'शिग्रु' और 'शोभांजन' का दर्जा
मोरिंगा के हर एक संस्कृत नामकरण के पीछे उसकी तासीर और शारीरिक प्रभाव का ठोस कारण जुड़ा हुआ है। उदाहरण के लिए, इसका सबसे लोकप्रिय नाम 'शिग्रु' इसके बेहद तीक्ष्ण और शरीर के सूक्ष्म स्रोतों को भेदने वाले गुण से प्रेरित है। जिस प्रकार एक अचूक बाण सीधे लक्ष्य को भेदता है, उसी प्रकार शिग्रु शरीर के भीतर तेजी से प्रवेश कर वात, पित्त और कफ के असंतुलन को ठीक करता है तथा अंदरूनी सूजन को जड़ से मिटाने में मदद करता है। वहीं, इसके अत्यंत सुंदर, मनमोहक और कल्याणकारी वृक्ष स्वरूप के कारण इसे 'शोभांजन' कहा गया। इसकी पत्तियों और छाल से आने वाली काली मिर्च जैसी तेज गंध की वजह से इसे 'तीक्ष्णगन्धा' और 'कृष्णगन्धा' नाम दिया गया। मोरिंगा की पत्तियों में निहित दुर्लभ पोषक तत्वों के कारण इसे 'मूलकपर्णी' और नेत्र विकारों यानी आंखों की समस्याओं को दूर करने की क्षमता के चलते इसे 'अक्षीब' के नाम से संबोधित किया गया।
डाइट में कैसे करें मोरिंगा का इस्तेमाल?
भारत के अलग-अलग राज्यों और संस्कृतियों में मोरिंगा को अपनी दैनिक खानपान शैली में शामिल करने के कई पारंपरिक तरीके हैं। कुछ लोग इसकी लंबी डंठलनुमा फलियों (ड्रमस्टिक) की सब्जी, सांभर या सूप बनाकर चाव से खाते हैं, तो कुछ इसकी हरी पत्तियों की भुर्जी या साग बनाते हैं। आधुनिक वेलनेस रूटीन में मोरिंगा के सूखे पत्तों का पाउडर बेहद लोकप्रिय हो चुका है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत लोग इसके पाउडर को सुबह गुनगुने पानी या ताजे जूस में मिलाकर पीते हैं, जबकि कई लोग इसकी पत्तियों से तैयार हर्बल टी (Moringa Herbal Tea) का नियमित सेवन कर दिन की शुरुआत करते हैं।