कहीं रहने से पहले चाणक्य की ये बात जान लें, 5 चीजें न हों तो छोड़ दें जगह
महान कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और मार्गदर्शक आचार्य चाणक्य ने 'चाणक्य नीति' में सुखी, सुरक्षित और सफल जीवन जीने के कई व्यावहारिक सूत्र दिए हैं। उन्होंने अपने नीति ग्रंथ में सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत जीवन को सुरक्षित रखने के लिए निवास स्थान के चयन पर विशेष जोर दिया है।
चाणक्य के अनुसार, किसी भी स्थान पर बसने से पहले वहां की बुनियादी व्यवस्थाओं को परखना बेहद जरूरी है। यदि किसी जगह पर पांच अनिवार्य चीजें मौजूद न हों, तो मनुष्य को वहां एक दिन भी नहीं ठहरना चाहिए, अन्यथा वह किसी भी समय बड़े संकट में घिर सकता है।
क्या कहता है चाणक्य का श्लोक?
आचार्य चाणक्य ने इस संदर्भ में एक अत्यंत प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक के माध्यम से मानव जाति को सचेत किया है:
धनिकः श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पञ्चमः। पञ्च यत्र न विद्यन्ते न तत्र दिवसे वसेत।।
इस श्लोक का सीधा और स्पष्ट संदेश है कि जिस स्थान पर धनी व्यक्ति (व्यापारी), वेदपाठी विद्वान, शासक (प्रशासन), नदी (जल का स्रोत) और वैद्य (चिकित्सक) न हों, वहां व्यक्ति को एक पल के लिए भी डेरा नहीं डालना चाहिए।
1. जहां न हो कोई धनिक या व्यापारी: रोजगार का संकट
चाणक्य नीति के अनुसार, जिस नगर या गांव में सक्षम धनी लोग, उद्योगपति या व्यापारी निवास करते हैं, वहां व्यापार पनपता है और रोजगार के नए अवसर जन्म लेते हैं। ऐसे परिवेश में रहने से व्यक्ति को अपनी आजीविका चलाने और आर्थिक रूप से समृद्ध होने के रास्ते मिलते हैं। इसके विपरीत, जिस स्थान पर कोई धनवान या कारोबारी न हो, वहां आर्थिक तंगी, गरीबी और बेरोजगारी का साया हमेशा बना रहता है। इसलिए ऐसी जगह पर बसने से हमेशा बचना चाहिए।
2. जहां न हों ज्ञानी या विद्वान: नैतिक पतन का खतरा
जिस समाज में वेदों के ज्ञाता, शिक्षक, दार्शनिक या विद्वान लोग नहीं रहते, वहां के लोगों को कभी सही और गलत का अंतर समझाने वाला मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। आचार्य चाणक्य के अनुसार, ज्ञानियों के अभाव में समाज से संस्कार, सदाचार, शिष्टाचार और नैतिक मूल्यों का लोप हो जाता है। ऐसी दिशाहीन जगह पर रहने से मनुष्य और उसकी आने वाली पीढ़ी का बौद्धिक विकास रुक जाता है।
3. जहां न हो राजा या सक्षम शासक: अराजकता और कानूनहीनता
एक सुरक्षित जीवन के लिए कानून और व्यवस्था की मौजूदगी सबसे अनिवार्य शर्त है। जिस स्थान पर न्यायप्रिय राजा, मंत्री, सक्षम शासक या प्रशासनिक व्यवस्था नहीं होती, वहां सामाजिक ताना-बाना बिखर जाता है। ऐसी जगहों पर नियम-कायदों का पालन कराने वाला कोई नहीं होता, जिससे अराजकता, अपराध और असुरक्षा का माहौल बन जाता है। बलवान कमजोर का हक छीनने लगते हैं, इसलिए बिना शासन-प्रशासन वाले इलाके से तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए।
4. जहां न हो नदी या शुद्ध जल का स्रोत: जीवन पर सीधा संकट
जल ही जीवन का आधार है। चाणक्य नीति कहती है कि जिस स्थान पर नदी, प्राकृतिक जलस्रोत, झील या पर्याप्त पीने के पानी की व्यवस्था न हो, वहां रहना सीधे-सीधे अपने अस्तित्व को खतरे में डालना है। जल के बिना कृषि, व्यापार और दैनिक जीवन संभव नहीं हो सकता। जल संकट वाले क्षेत्र में बसने से इंसान को भीषण कष्टों और अभावों का सामना करना पड़ता है।
5. जहां न हो वैद्य या योग्य चिकित्सक: बीमारी में मौत का साया
मानव शरीर की प्रकृति ऐसी है कि वह कभी भी किसी मौसमी बीमारी, संक्रमण या गंभीर स्वास्थ्य समस्या की चपेट में आ सकता है। आपात स्थिति में जान बचाने के लिए कुशल वैद्य या डॉक्टर की तुरंत उपलब्धता जरूरी होती है। आचार्य चाणक्य स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि जिस क्षेत्र के आसपास कोई वैद्य या चिकित्सकीय सुविधा मौजूद न हो, वहां एक दिन भी रहना जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने से साधारण बीमारी भी जानलेवा बन जाती है।