रावण जलते ही राख लूटने क्यों दौड़ पड़ते हैं लोग, कारण जानकर दंग रह जाएंगे आप
विजयादशमी के पावन पर्व पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के दहन के ठीक बाद मैदानों में लोगों को बची हुई राख इकट्ठा करने के लिए दौड़ते हुए देखना एक बेहद आम नजारा है। वैदिक पंचांग के मुताबिक आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में मनाए जाने वाले इस त्योहार पर पुतले की भस्म को घर ले जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लोक मान्यताओं और पारंपरिक ज्योतिषीय उपायों में इस भस्म को नकारात्मक ऊर्जा के नाश और सुख-समृद्धि के विस्तार से जोड़कर देखा जाता है, जिसे लोग आज भी पूरे विश्वास के साथ अपने घरों में सहेजते हैं।
धार्मिक आस्था के अनुसार रावण दहन की राख को घर में रखने से बुरी नजर और काली शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। यदि परिवार के किसी सदस्य, विशेषकर बच्चों को बार-बार नजर लगने की समस्या हो, तो इस भस्म को पीड़ित व्यक्ति के सिर से सात बार उतारने का विधान लोक परंपराओं में मिलता है। इसके अलावा घर के पारिवारिक क्लेश और वास्तु दोष के शमन के लिए इस पवित्र भस्म को लाल या पीले कपड़े की पोटली में बांधकर मकान के मुख्य प्रवेश द्वार पर लटकाने की मान्यता है, जिससे चौखट से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
आर्थिक तंगी से मुक्ति और धन वृद्धि के लिए भी इस भस्म से जुड़े कई उपाय प्रचलित हैं। मान्यता है कि रावण दहन की थोड़ी सी राख को शुद्ध लाल कपड़े में लपेटकर घर की तिजोरी, अलमारी या धन रखने के स्थान पर रखने से बरकत बढ़ती है और मां लक्ष्मी की कृपा से रुका हुआ धन वापस लौटने लगता है। हालांकि इन आस्थाओं के बीच सावधानी बरतना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि आधुनिक समय में पुतलों के निर्माण में तार, धातु, प्लास्टिक और आतिशबाजी के जले हुए खतरनाक अवशेष मिले हो सकते हैं, इसलिए इसे उठाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि किसी तरह की शारीरिक चोट न पहुंचे।