कार्यभार संभालते ही ACS सीके अनिल का एक्शन, बिहार के शिक्षकों के लिए बदले नियम

कार्यभार संभालते ही ACS सीके अनिल का एक्शन, बिहार के शिक्षकों के लिए बदले नियम

बिहार शिक्षा विभाग में नए अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सीके अनिल ने कुर्सी संभालते ही शुरू किया 'एक्शन मोड'; राज्य के लाखों शिक्षकों के लिए जारी किए नए और सख्त दिशा-निर्देश, स्कूल की कार्यशैली में होगा बड़ा फेरबदल

बिहार की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नए और कड़े फैसले की गूंज सुनाई दे रही है। बिहार के शिक्षा विभाग में हाल ही में अतिरिक्त मुख्य सचिव (Additional Chief Secretary - ACS) का कार्यभार संभालने वाले वरिष्ठ और बेबाक आईएएस अधिकारी सीके अनिल (CK Anil) ने अपने पद की कमान संभालते ही ताबड़तोड़ एक्शन लेना शुरू कर दिया है। अपने सख्त प्रशासनिक रवैये और पारदर्शी कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले सीके अनिल ने कार्यभार ग्रहण करने के महज कुछ ही घंटों के भीतर राज्य के लाखों सरकारी शिक्षकों और विद्यालयों के लिए नियमों में बड़े बदलाव कर दिए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा जारी इन नए आदेशों के बाद से सूबे के शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और शिक्षा कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है। सरकार का यह कदम राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने, शिक्षकों की जवाबदेही तय करने और बच्चों की उपस्थिति को सौ फीसदी सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

एसीएस सीके अनिल का कार्यभार संभालते ही पहला बड़ा कदम: क्यों पड़ी नियमों में बदलाव की जरूरत?

बिहार के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से प्रशासनिक कसावट, शिक्षकों के समय पर स्कूल न पहुंचने, शिक्षण कार्य में उदासीनता और विभिन्न प्रकार के गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझे रहने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। मुख्यमंत्री कार्यालय और शिक्षा मंत्री को मिल रही इन जमीनी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सरकार ने अनुभवी और कड़क मिजाज माने जाने वाले आईएएस अधिकारी सीके अनिल को शिक्षा विभाग की मुख्य कमान सौंपी है। कार्यभार संभालते ही सीके अनिल ने बिना कोई वक्त गंवाए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) तथा प्रखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को स्पष्ट संदेश दिया कि अब शिक्षा विभाग में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी कड़ी में शिक्षकों के लिए उपस्थिति, अवकाश और कक्षाओं के संचालन से जुड़े नियमों में तत्काल प्रभाव से बड़े संशोधन किए गए हैं।

शिक्षकों की उपस्थिति और समय की पाबंदी पर सबसे बड़ा प्रहार: लागू हुए नए नियम

निसंदेह सीके अनिल द्वारा किए गए इन बदलावों में सबसे महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय शिक्षकों की टाइमिंग और अटेंडेंस से जुड़े कड़े निर्देश हैं। नए नियमों के मुताबिक, अब सभी सरकारी शिक्षकों को स्कूल खुलने के ठीक पंद्रह मिनट पहले यानी सुबह की प्रार्थना से पहले हर हाल में विद्यालय परिसर में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, डिजिटल ई-शिक्षा कोष (E-Shiksha Kosh) पोर्टल के जरिए शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की निगरानी अब और अधिक सख्ती से की जाएगी। यदि कोई शिक्षक बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के विद्यालय से अनुपस्थित पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत एक-दिन का वेतन काटने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, स्कूल अवधि के दौरान कोई भी शिक्षक अपने मोबाइल फोन का व्यक्तिगत इस्तेमाल या सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रह सकेगा, जिससे उनका पूरा ध्यान केवल बच्चों को पढ़ाने पर केंद्रित हो सके।

गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति और केवल पढ़ाई पर फोकस करने का निर्देश

बिहार के शिक्षकों की यह पुरानी और सबसे बड़ी शिकायत रही है कि उनसे शिक्षण कार्य के अलावा गैर-शैक्षणिक कार्य जैसे विभिन्न प्रकार के सरकारी सर्वे, रिपोर्ट तैयार करना और अन्य विभागों के काम कराए जाते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता है। नए एसीएस सीके अनिल ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया है कि अब से किसी भी शिक्षक को उनकी शिक्षण अवधि के दौरान किसी भी ऐसे गैर-शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया जाएगा, जिसका सीधा संबंध बच्चों की शिक्षा से न हो। शिक्षा विभाग का यह निर्णय शिक्षक संगठनों द्वारा बेहद सराहा जा रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि इस कदम से शिक्षकों का मानसिक तनाव कम होगा और वे पूरी ऊर्जा के साथ कक्षाओं में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे पाएंगे।

जिला शिक्षा अधिकारियों और निरीक्षकों को मिली खुली छूट: औचक निरीक्षण का नया दौर शुरू

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को जमीन पर सुधारने के लिए अब कागजी बैठकों के बजाय मैदानी स्तर पर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) की संस्कृति को फिर से जिंदा कर दिया गया है। एसीएस सीके अनिल ने सभी जिलाधिकारियों, डीईओ और शिक्षा विभाग के उड़नदस्ते की टीमों को निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी पूर्व सूचना के राज्य के किसी भी ग्रामीण या शहरी क्षेत्र के सरकारी स्कूल का औचक निरीक्षण कर सकते हैं। यदि निरीक्षण के दौरान कोई स्कूल बंद मिलता है, शिक्षक अनुपस्थित पाए जाते हैं या मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता में कोई गड़बड़ी मिलती है, तो संबंधित प्रधानाध्यापक और दोषी शिक्षकों के खिलाफ सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। इस कड़े प्रशासनिक खौफ के कारण पूरे प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और अनुशासन में रातों-रात सुधार देखने को मिल रहा है।

नए बदलावों को लेकर शिक्षकों और शिक्षा जगत में मिल रही है मिली-जुली प्रतिक्रिया

एसीएस सीके अनिल के इन ताबड़तोड़ फैसलों और नियमों में किए गए बदलावों पर शिक्षा जगत और शिक्षक संघों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक ओर अधिकांश ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक इन बदलावों का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे स्कूल की व्यवस्था पटरी पर आएगी और पढ़ाई का माहौल बनेगा, वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षक संघों का कहना है कि नियमों को लागू करने के साथ-साथ शिक्षकों की अन्य बुनियादी समस्याओं और वेतन-ब भत्तों के मामलों पर भी विभाग को समान रूप से ध्यान देना चाहिए। हालांकि, यह तय है कि सीके अनिल के इस आक्रामक और एक्शन-ओरिएंटेड रुख ने बिहार के शिक्षा विभाग में वर्षों से जमी सुस्ती की परत को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।