बिहार पंचायत चुनाव: EBC आरक्षण पर बड़ा मंथन शुरू, 50% कैप और जातियों के प्रतिनिधित्व से तय होगा नया फॉर्मूला

बिहार पंचायत चुनाव: EBC आरक्षण पर बड़ा मंथन शुरू, 50% कैप और जातियों के प्रतिनिधित्व से तय होगा नया फॉर्मूला

बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच आरक्षण का नया खाका खींचने की कवायद तेज हो चुकी है। राज्य सरकार के स्तर पर इस समय सबसे ज्यादा ध्यान अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) को मिलने वाले आरक्षण के सटीक निर्धारण पर दिया जा रहा है।

फिलहाल यह पूरी तरह तय नहीं है कि ईबीसी वर्ग के लिए कुल कितनी सीटें आरक्षित की जाएंगी। इस बार सीटों का बंटवारा किसी एकमुश्त आंकड़े के आधार पर करने के बजाय पंचायत स्तर पर मौजूद पुख्ता आंकड़ों, सामाजिक वस्तुस्थिति और तय किए जा रहे कड़े मानकों के आधार पर किया जाएगा।

पंचायती राज विभाग तैयार कर रहा मानक, EBC आयोग करेगा अंतिम समीक्षा

आरक्षण का वैज्ञानिक आधार तय करने के लिए पंचायती राज विभाग की एक विशेष तकनीकी टीम दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) तैयार करने में जुटी है। विभाग की ओर से मानक तय किए जाने के बाद इस पूरे मसौदे को बिहार राज्य अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग को सौंपा जाएगा। आयोग धरातलीय आंकड़ों, शैक्षणिक व सामाजिक स्थिति का गहन अध्ययन करेगा और सरकार को अपनी औपचारिक सिफारिशें भेजेगा। आयोग की इस रिपोर्ट के बाद ही राज्य में आरक्षण का अंतिम वैधानिक स्वरूप सामने आ सकेगा।

50% कैप का जटिल गणित: जानिए कैसे तय होगा EBC का हिस्सा

सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) को मिलाकर कुल आरक्षण की सीमा किसी भी स्थिति में 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। यही कारण है कि पूरे राज्य में ईबीसी के लिए कोई एक समान निश्चित प्रतिशत लागू नहीं किया जा सकता।

सबसे पहले संबंधित पंचायत में एससी और एसटी वर्ग के लिए आबादी के अनुसार आरक्षण निर्धारित होगा, जिसके बाद 50 फीसदी की तय सीमा में जो जगह बचेगी, उसी के आधार पर ईबीसी का कोटा तय किया जाएगा। इसे सीधे तौर पर समझें तो यदि किसी पंचायत में एससी-एसटी आरक्षण 40 फीसदी तक पहुंचता है, तो 50 फीसदी की अधिकतम सीमा के तहत शेष बचा 10 प्रतिशत हिस्सा ही ईबीसी वर्ग के खाते में आ सकेगा। इस कारण हर पंचायत में आरक्षण का अनुपात एक-दूसरे से भिन्न हो सकता है।

आबादी के साथ राजनीतिक भागीदारी और 122 जातियों के प्रतिनिधित्व की जांच

सीटों के निर्धारण में केवल जनसंख्या ही एकमात्र पैमाना नहीं होगी, बल्कि ईबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक स्थिति को भी परखा जाएगा। इसके अलावा पंचायती राज व्यवस्था में इस वर्ग को अब तक मिले वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भी ऑडिट होगा। आयोग इस बिंदु की भी बारीकी से पड़ताल करेगा कि आरक्षण का लाभ ईबीसी में शामिल सभी जातियों तक समान रूप से पहुंचा है या इसका फायदा केवल कुछ प्रभावशाली समूहों तक सीमित रहा। बिहार की आधिकारिक ईबीसी सूची में धानुक, तेली, मल्लाह, कानू और कहार सहित करीब 122 जातियां शामिल हैं। ऐसे में समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़ी जातियों को त्रिस्तरीय पंचायतों में उचित भागीदारी दिलाना इस नए फॉर्मूले की मुख्य प्राथमिकता होगी। आयोग की अंतिम रिपोर्ट और कैबिनेट के निर्णय के बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग आरक्षित सीटों की आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा।