JCB पर चढ़े लोग, महिला पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की: जानिए रांची के सैटेलाइट चौक पर क्यों हुआ इतना बड़ा हंगामा

JCB पर चढ़े लोग, महिला पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की: जानिए रांची के सैटेलाइट चौक पर क्यों हुआ इतना बड़ा हंगामा

झारखंड की राजधानी रांची स्थित सैटेलाइट चौक के समीप बुधवार को उस समय भारी अराजकता और तनाव का माहौल बन गया, जब भारी उद्योग निगम (HEC) की जमीन पर बने अवैध निर्माणों को ढहाने पहुंची प्रशासनिक टीम को स्थानीय बस्तीवासियों के उग्र विरोध का सामना करना पड़ा।

शांतिपूर्ण समझाइश के बीच शुरू हुआ गतिरोध देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर अचानक पत्थरों से हमला बोल दिया और ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की व मारपीट की। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए हल्का लाठीचार्ज किया, जिसमें पुलिसकर्मियों समेत कई स्थानीय लोग चोटिल हो गए।

जेसीबी पर चढ़े प्रदर्शनकारी, अधिकारियों की अपील के बाद भड़की हिंसा

प्रशासनिक रणनीति के तहत बुधवार की सुबह से ही भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू करने की तैयारी थी। नगर निगम और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लाउडस्पीकर के जरिए बस्तीवासियों से शांति बनाए रखने और कार्रवाई में सहयोग की अपील कर रहे थे। इसी बीच दर्जनों आक्रोशित महिला-पुरुष बुलडोजर और जेसीबी मशीनों के आगे जमीन पर लेट गए। कुछ युवक विरोध स्वरूप जेसीबी की छत और बोनट पर चढ़ गए। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने जब उन्हें नीचे उतारने की कोशिश की, तो माहौल अचानक बेकाबू हो गया और भीड़ के बीच से पुलिस दल पर अंधाधुंध पथराव शुरू हो गया, जिसके चलते अफरा-तफरी मच गई।

डीएसपी हटिया का बयान: पुलिस पर हमला करने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

घटनास्थल पर कमान संभाल रहे हटिया के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) नीरज ने बताया कि सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए उपद्रवियों ने अतिक्रमण हटाने गई संयुक्त टीम पर जानलेवा पथराव किया। इस हमले में कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं। कानून-व्यवस्था बहाल करने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस को नियंत्रित लाठीचार्ज कर भीड़ को पीछे खदेड़ना पड़ा। डीएसपी ने पुष्टि की कि घटनास्थल से छह से अधिक सक्रिय उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस वीडियो फुटेज और फोटोग्राफ्स के आधार पर पथराव करने वालों और महिला पुलिसकर्मियों पर हाथ उठाने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई कर रही है।

'बिना पुनर्वास हम कहां जाएं?' बेघर होने के डर से छलका बस्तीवासियों का दर्द

दूसरी ओर, कार्रवाई का विरोध कर रहे बस्ती के लोगों का तर्क है कि वे पिछले कई दशकों से एचईसी परिसर के इस हिस्से में कच्चे-पक्के मकान बनाकर रह रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने पहले उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी बस्तियों पर बुल्डोजर नहीं चलेगा, लेकिन अचानक भारी पुलिस बल के साथ जेसीबी उतार दी गई। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि घरों में दूधमुंहे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग मौजूद हैं; ऐसे में बिना किसी वैकल्पिक आवास या पुनर्वास पैकेज के उनके सिर से छत छीन लेना अमानवीय है। स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार पहले उनके पुनर्वास के लिए पक्की व्यवस्था करे, उसके बाद ही जमीन खाली कराई जाए।