लालू परिवार के 'सियासी गढ़' पर संकट: राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करने का अल्टीमेटम; सरकार ने दी 7 दिनों की मोहलत

लालू परिवार के 'सियासी गढ़' पर संकट: राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करने का अल्टीमेटम; सरकार ने दी 7 दिनों की मोहलत

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बंगले की सियासत गरमा गई है। सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी (Rabri Devi) को उनके बहुचर्चित '10 सर्कुलर रोड' स्थित सरकारी आवास को खाली करने के लिए सरकार की तरफ से अंतिम और कड़ा नोटिस थमा दिया गया है। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने बीती 22 जून को यह अंतिम आदेश जारी किया है, जिसके तहत राबड़ी देवी को नोटिस मिलने के ठीक 7 दिनों के भीतर इस बंगले को पूरी तरह खाली करने का आखिरी मौका दिया गया है। विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस तय समय-सीमा में बंगला खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन नियमों के तहत सख्त और बलपूर्वक कदम उठाने के लिए मजबूर होगा।

29 जून तक का मिला है समय, विभाग ने गिनाए पुराने सारे रिमाइंडर्स

भवन निर्माण विभाग द्वारा 22 जून को जारी किए गए इस अंतिम रिमाइंडर्स नोटिस की समय-सीमा आगामी 29 जून को पूरी हो रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव के परिवार को जून महीने के अंत तक हर हाल में इस बंगले का कब्जा प्रशासन को सौंपना होगा। इस नए नोटिस में विभाग ने राबड़ी देवी को पिछले कई महीनों में भेजे गए सभी नोटिस और रिमाइंडर्स का पूरा ब्योरा भी संलघ्न किया है। इसके साथ ही उन्हें नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से अलॉट किए गए '39 हार्डिंग रोड' स्थित नए आवास के बारे में भी दोबारा अवगत कराया गया है ताकि वे वहां शिफ्ट हो सकें।

बीजेपी मंत्री नंदकिशोर राम को अलॉट हो चुका है यह बंगला, राबड़ी ने नहीं किया था खाली

दरअसल, 10 सर्कुलर रोड स्थित यह आलीशान बंगला अब एनडीए (NDA) सरकार में बीजेपी कोटे से कैबिनेट मंत्री बने नंदकिशोर राम को आधिकारिक तौर पर आवंटित किया जा चुका है। यही वजह है कि विभाग इसे खाली कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इससे पहले 31 मई 2026 को भी प्रशासन ने राबड़ी देवी को 15 दिनों का अल्टीमेटम देकर प्रॉपर्टी सौंपने का निर्देश दिया था, जिसकी समय-सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। वहीं, इस मामले में सबसे पहला नोटिस पिछले साल 25 नवंबर 2025 को ही जारी किया गया था, लेकिन लालू परिवार ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया।

2005 से लालू परिवार का ठिकाना रहा है 10 सर्कुलर रोड, कई ऐतिहासिक फैसलों का गवाह

यह बंगला केवल एक सरकारी रिहाइश नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति का एक बहुत बड़ा केंद्र रहा है। साल 2005 में जब राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, तब तत्कालीन नीतीश कुमार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के कोटे से यह बंगला उन्हें अलॉट किया था। पिछले दो दशकों से लालू प्रसाद यादव का पूरा परिवार, तेजस्वी यादव और आरजेडी के तमाम बड़े नेता इसी बंगले से बिहार की पूरी सियासत को नियंत्रित करते आए हैं। आरजेडी के कई ऐतिहासिक फैसलों और महागठबंधन की सरकारों का खाका इसी 10 सर्कुलर रोड के भीतर तैयार हुआ था, जिसके कारण इस बंगले से लालू परिवार का गहरा भावनात्मक लगाव भी जुड़ा हुआ है।

क्या कोर्ट का रुख करेगा लालू परिवार? महागठबंधन और एनडीए में जुबानी जंग तेज

इस अंतिम नोटिस के बाद बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या राबड़ी देवी और आरजेडी इस फैसले के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे या फिर चुपचाप 29 जून तक बंगला खाली कर देंगी। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल और सत्ताधारी जेडीयू-बीजेपी के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। एनडीए नेताओं का कहना है कि कानून और नियम सबके लिए बराबर हैं और जब पद बदल चुका है तो बंगला भी छोड़ना होगा। वहीं विपक्षी दल आरजेडी का आरोप है कि सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है और जानबूझकर लालू परिवार को परेशान करने के लिए यह हड़बड़ी दिखाई जा रही है।