बॉडी गार्ड की हत्या, छत से छलांग... फहीम खान के घर AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग मामले में 22 साल बाद फैसला, शाहिद आलम समेत 3 दोषी

बॉडी गार्ड की हत्या, छत से छलांग... फहीम खान के घर AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग मामले में 22 साल बाद फैसला, शाहिद आलम समेत 3 दोषी

भारतीय न्याय व्यवस्था की चक्की भले ही धीमी गति से चलती हो, लेकिन जब उसका न्याय का पहिया घूमता है, तो बड़े से बड़े अपराधियों के सिंहासन डगमगा जाते हैं। झारखंड के कोयलांचल और आपराधिक इतिहास के पन्नों में दर्ज एक ऐसा ही बेहद सनसनीखेज, खौफनाक और बहुचर्चित मामला आज से ठीक बाइस साल पहले धनबाद की धरती पर घटित हुआ था। कुख्यात माफिया और आपराधिक सरगना फहीम खान के घर को नेस्तनाबूद करने के इरादे से लाई गई एके-47 (AK-47) जैसी प्रतिबंधित और स्वचालित हथियारों से की गई अंधाधुंध फायरिंग, एक निर्दोष बॉडीगार्ड की निर्मम हत्या और जान बचाने के लिए छत से छलांग लगाने की वह घटना आज भी लोगों के जेहन में सिहरन पैदा कर देती है। इस वीभत्स हत्याकांड और गोलीबारी के मामले में आखिरकार लंबी कानूनी दांवपेंच, गवाहों के मुकरने के खतरों और दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। विशेष अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपियों में शुमार शाहिद आलम समेत तीन लोगों को दोषी करार दिया है, जिससे एक बार फिर से इस पुराने और बहुचर्चित गैंगवार की फाइलें सुर्खियों के केंद्र में आ गई हैं। इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि अपराध के रास्ते भले ही लंबे और सुरक्षित लग सकते हैं, लेकिन कानून के लंबे हाथों से बच निकलना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं होता है।

क्या थी वह खौफनाक रात: जब एके-47 की गड़गड़ाहट से दहल उठा था धनबाद का इलाका

यह घटना उस दौर की है जब धनबाद और आसपास के कोयलांचल क्षेत्रों में वर्चस्व की लड़ाई अपने चरम पर थी और अंडरवर्ल्ड के सरगना अपनी धाक जमाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते थे। एक सामान्य सी दिखने वाली शांत रात में अचानक हथियारों से लैस अपराधियों का एक जत्था कुख्यात फहीम खान के ठिकाने पर आ धमका। उनके हाथों में कोई मामूली देसी कट्टा या पिस्तौल नहीं, बल्कि सीधे आतंकवादियों और युद्ध के मैदानों में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक और घातक एके-47 राइफलें थीं। अपराधियों ने किसी भी चेतावनी या बातचीत का मौका दिए बिना फहीम खान के आवास पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। ताबड़तोड़ हो रही इस गोलीबारी से पूरा इलाका दहल उठा और आसपास के लोग अपने घरों में दुबक गए। अंधाधुंध फायरिंग की इस आवाज से हवा गूंज उठी और हर तरफ चीख-पुकार मच गई। फहीम खान के घर की दीवारें, दरवाजे और खिड़कियां छलनी हो चुकी थीं, और ऐसा लग रहा था कि हमलावरों का एकमात्र उद्देश्य घर के अंदर मौजूद हर शख्स को मौत के घाट उतार देना था।

बॉडीगार्ड की हत्या और जान बचाने के लिए छत से कूदने की वह रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान

इस अचानक हुए भीषण हमले के दौरान जब गोलियों की बौछार तेज हुई, तो अफरा-तफरी के इस माहौल में फहीम खान की सुरक्षा में तैनात बॉडीगार्ड ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपराधियों का मुकाबला करने की कोशिश की। लेकिन आधुनिक हथियारों से लैस हमलावरों के सामने वह टिक नहीं सका और गोलियों की बौछार से उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। दूसरी तरफ, जान बचाने के लिए घर के अंदर मौजूद लोगों और खुद फहीम खान के परिवार के सदस्यों ने अपनी जान बचाने के वास्ते ऊपरी मंजिल की छतों से नीचे छलांग लगानी शुरू कर दी। इस आपाधापी और छत से कूदने के क्रम में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनके शरीर की हड्डियां तक टूट गईं। उस रात का मंजर किसी हॉरर फिल्म से भी ज्यादा डरावना था, जहाँ चारों तरफ खून के छींटे, खाली खोखे और अपनों की चीखें सुनाई दे रही थीं। हमलावर इस खूनी खेल को अंजाम देने के बाद बड़े आराम से अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए, जिसने स्थानीय पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया था।

22 साल लंबी चली अदालत की लड़ाई और गवाहों-सबूतों का उतार-चढ़ाव भरा सफर

किसी भी आपराधिक मामले में जब अपराधी राजनीतिक या बाहुबली पृष्ठिभूमि से जुड़े होते हैं, तो न्याय मिलने का सफर कितना कठिन हो जाता है, इस मामले ने इसकी एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। पिछले 22 वर्षों के दौरान इस केस की सुनवाई में अनगिनत मोड़ आए। कई बार ऐसा दौर भी आया जब मुख्य गवाहों को डराया-धमकाया गया, कुछ गवाह मुकर गए और केस फाइलें कोर्ट के कमरों में धूल फांकती नजर आईं। लेकिन विशेष अभियोजक (Special Prosecutor), पुलिस के कुछ ईमानदार अधिकारियों और न्याय पाने की जिद लिए खड़े पीड़ितों के संघर्ष ने इस मामले को टूटने नहीं दिया। फॉरेंसिक रिपोर्ट्स, एके-47 के कारतूसों के खोखे, मेडिकल रिपोर्ट्स और उस रात की परिस्थितियों का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। दो दशक से अधिक समय तक चली इस लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार न्यायाधीश ने तमाम सबूतों को अकाट्य मानते हुए दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।

शाहिद आलम समेत तीन दोषियों को सजा का ऐलान और क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म

धनबाद की अदालत द्वारा शाहिद आलम और अन्य दो सहयोगियों को इस बहुचर्चित फायरिंग और हत्या के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। फैसले की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक महकमे में भी चौकसी बढ़ा दी गई है, क्योंकि इस मामले के तार पुराने गैंगवार से जुड़े हुए हैं। अदालत द्वारा अब इन दोषियों को सजा की घोषणा की जानी है, जिसके तहत उन्हें लंबी कैद या उम्रकैद की सजा मिल सकती है। इस फैसले से उन तमाम लोगों को एक बार फिर से न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है जो यह मान बैठे थे कि रसूखदार अपराधी कभी कानून की गिरफ्त में नहीं आ सकते। फहीम खान के घर पर हुई इस एके-47 फायरिंग की गूंज भले ही दो दशक पुरानी हो चुकी है, लेकिन इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराध के बीज बोने वाले को एक न एक दिन उसके परिणाम भुगतने ही पड़ते हैं।