भरत तिवारी एनकाउंटर पर देवकीनंदन ठाकुर का बड़ा बयान: बोले- 'वह 10 साल पहले पिंडदान कर चुका था, गरीबों को कहीं न्याय नहीं मिलता'
बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी (Bharat Bhushan Tiwari Encounter Case) के पुलिस एनकाउंटर का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस कथित एनकाउंटर को लेकर अब देश के सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर (Devkinandan Thakur) की बेहद भावुक और तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए एक बयान जारी कर इस पूरी घटना पर गहरा दुख जताया है और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
"मन अशांत और दुखी है, समाज से संवेदनाएं खत्म हो रहीं"
देवकीनंदन ठाकुर ने अपने बयान की शुरुआत बेहद दुखी मन से की। उन्होंने कहा, "आज मेरा मन बहुत अशांत और दुखी है। ऐसा लग रहा है जैसे हमारे समाज से मानवीय संवेदनाएं पूरी तरह समाप्त होती जा रही हैं। मैं बात कर रहा हूं भरत तिवारी की। भरत का जो विषय है, उसे हम सब अच्छी तरह जानते हैं। भरत अभी एक युवा था। उसने तो आज से 10 साल पहले ही अपना पिंडदान कर दिया था कि वह अपना पूरा जीवन समाज की सेवा में समर्पित करेगा।"
"शासन-प्रशासन ईमानदारी से बताए, वहां क्या हो रहा है?"
कथावाचक ने देश की प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था पर उंगली उठाते हुए कहा कि आज के दौर में जमीनी हकीकत बहुत अलग है।
गरीबों के न्याय पर उठाए सवाल:
उन्होंने कहा, "एक तरफ हम सब चाहते हैं कि समाज में अच्छे लोग आगे आएं, जो दूसरों के दुख-दर्द को समझें। लेकिन अगर कोई सच में दूसरों की मदद करने की बात करता है, तो उसकी सुनने वाला कौन है? मैं नहीं जानता कि प्रशासन या कोर्ट के भीतर तकनीकी रूप से क्या चल रहा है, मुझे उसकी गहरी समझ नहीं है। लेकिन जो लोग भी शासन-प्रशासन में बैठकर न्याय करने का बड़ा-बड़ा दावा कर रहे हैं, वे एक बार अपनी ईमानदारी से बताएं कि वहां वास्तव में क्या हो रहा है? सच तो यह है कि आज गरीबों को कहीं भी न्याय नहीं मिलता है।"
"क्या उसकी मां का बेटा वापस ला सकोगे?"
देवकीनंदन ठाकुर ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आत्मचिंतन करने की सलाह देते हुए बेहद भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि जिस किसी ने भी यह गलत काम किया है, वह एक बार अपने दिल पर हाथ रखकर सोचे कि क्या वे उस रोती हुई मां का बेटा वापस ला पाएंगे? क्या वे उस मां के पास जाकर बैठ सकेंगे और उसकी दुखी आंखों में आंखें डाल पाएंगे? उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उस मां की बद्दुआएं बहुत भारी हैं और जो कुछ भी हुआ है, वह बिल्कुल ठीक नहीं हुआ है।
उन्होंने पुरजोर मांग की कि इस पूरे एनकाउंटर मामले की निष्पक्ष जांच होकर पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए, ताकि समाज में कानून और व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा और संवेदनाएं दोबारा जग सकें।