पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार के जेल वार्डरों की बल्ले-बल्ले, 2015 से मिलेगा 1 महीने का एक्स्ट्रा वेतन
बिहार के जेल वार्डरों (कक्षपालों) के लिए पटना हाई कोर्ट से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अदालत ने कर्मचारियों के हित में एक अहम फैसला सुनाते हुए उन्हें हर वित्तीय वर्ष में एक महीने के वेतन के बराबर अतिरिक्त मानदेय देने का आदेश दिया है। इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि जेल कर्मियों को इस आर्थिक लाभ की गणना 27 अगस्त 2015 से की जाएगी, जिससे उन्हें पिछले कई सालों का बकाया (एरियर) भी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डॉ. अंशुमान की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि जेल वार्डरों को यह लाभ 2019 या 2024 से देना पूरी तरह अनुचित है। दरअसल, राज्य सरकार ने साल 2015 में पुलिस और कुछ अन्य विभागों के अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए हर साल एक महीने का अतिरिक्त वेतन देने का फैसला किया था, लेकिन तब तकनीकी कारणों से जेल वार्डरों को इस लिस्ट से बाहर रखा गया था। बाद में विभागीय स्तर पर उन्हें शामिल तो किया गया, लेकिन लाभ देने की शुरुआत की तारीख को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
इसके बाद बिहार जेल मेन्स एसोसिएशन ने इस देरी के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एसोसिएशन की दलील थी कि जब मूल नीति 2015 में ही बनी थी, तो जेल कर्मचारियों को भी उसी तारीख से इसका सीधा फायदा मिलना चाहिए। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि किसी भी तकनीकी चूक के कारण कर्मचारियों को उनके जायज हक से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद अब जेल वार्डरों को न सिर्फ हर साल अतिरिक्त मानदेय मिलेगा, बल्कि 2015 से अब तक का बकाया मिलने की भी प्रबल संभावना बन गई है, जिससे कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।