मंत्री बनने के 53 दिन बाद सरकारी आवास में शिफ्ट हुए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, सीएम सम्राट चौधरी के बने पड़ोसी
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार सोमवार को पटना के पॉश इलाके में स्थित अपने नए सरकारी आवास में शिफ्ट हो गए हैं। मंत्री बनने के 53 दिन बाद उन्होंने पटना के 5 देशरत्न मार्ग स्थित इस बंगले में गृह प्रवेश किया। इस बेहद खास मौके पर उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री एवं जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार भी मौजूद रहे।
पिता के आशीर्वाद से हुआ गृह प्रवेश
निशांत कुमार ने अपने नए आवास में गृह प्रवेश के दौरान सत्यनारायण कथा और विशेष पूजा का आयोजन किया था। इस दौरान उनके पिता नीतीश कुमार और परिवार के अन्य सदस्य साथ रहे। निशांत ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे अब अपने सरकारी आवास में रहने आ गए हैं, लेकिन वे हमेशा की तरह अपने पिता के साथ जुड़ाव बनाए रखेंगे और दोनों आवासों के बीच आते-जाते रहेंगे।
सम्राट चौधरी के ठीक बगल में है नया ठिकाना
निशांत कुमार का यह नया आवास मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के '1 अणे मार्ग' स्थित आधिकारिक निवास के ठीक बगल में स्थित है। दिलचस्प बात यह है कि सम्राट चौधरी जब उपमुख्यमंत्री थे, तब वे इसी बंगले (5 देशरत्न मार्ग) में रहा करते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद जब वे मुख्य आवास में शिफ्ट हुए, तब यह बंगला खाली हुआ और विभाग ने इसे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को आवंटित कर दिया।
राजनीतिक रूप से बेहद 'हाई-प्रोफाइल' है यह बंगला
पटना का '5 देशरत्न मार्ग' बंगला बिहार की राजनीति में हमेशा से ही सत्ता के केंद्र के रूप में जाना जाता है। इस बंगले का इतिहास बताता है कि यहां अक्सर सरकार में 'नंबर दो' की हैसियत रखने वाले नेता ही रहते आए हैं। इससे पहले इस बंगले में:
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सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री रहते हुए)
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तेजस्वी यादव (महागठबंधन सरकार के दौरान उपमुख्यमंत्री रहते हुए)
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सुशील कुमार मोदी (पूर्व उपमुख्यमंत्री)
जैसे दिग्गज नेता निवास कर चुके हैं।
कैबिनेट में शामिल होने का सफर
बता दें कि अप्रैल 2026 में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आया था। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई एनडीए सरकार का गठन हुआ। मई महीने में हुए कैबिनेट विस्तार के दौरान निशांत कुमार को सरकार में शामिल किया गया और 7 मई 2026 को उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में शपथ ली। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालते ही वे अपने प्रशासनिक कार्यों और विभागीय सुधारों को लेकर लगातार सक्रिय बने हुए हैं।