खास महल की जमीन पर सम्राट सरकार का ऐतिहासिक फैसला: 60-70 साल से रह रहे लोगों को मिलेगा मालिकाना हक
बिहार में जमीन विवादों को सुलझाने और भूमि प्रबंधन को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक और बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य के विभिन्न जिलों में 'खास महल' (Khas Mahal) की सरकारी भूमि पर पीढ़ियों से रह रहे परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी है। सरकार अब इन जमीनों को पूरी तरह 'फ्री-होल्ड' (Free Hold) कर वहां रह रहे लोगों को उनका असली मालिकाना हक सौंपने की तैयारी कर रही है।
पटना के सूचना भवन में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूबे के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने सरकार के इस बड़े नीतिगत निर्णय की आधिकारिक जानकारी दी।
15 अगस्त के बाद शुरू होगी प्रक्रिया, तय होगा बाजार मूल्य
राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि सासाराम (रोहतास), पूर्णिया, कटिहार और राज्य के अन्य जिलों में ऐसे हजारों परिवार हैं, जो पिछले 60 से 70 वर्षों से खास महल की जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन तकनीकी और कानूनी अड़चनों के कारण उन्हें आज तक मालिकाना हक नहीं मिल सका है।
इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार ने पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है:
-
जनसंवाद की शुरुआत: आगामी 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के बाद विभाग के अधिकारी सीधे प्रभावित जिलों में जाकर वहां रह रहे लोगों से बातचीत करेंगे।
-
बाजार मूल्य पर चर्चा: इन जमीनों को रैयतों (निवासियों) के नाम करने के लिए वर्तमान बाजार मूल्य (सर्किल रेट) के हिसाब से कितनी उचित राशि ली जानी चाहिए, इस पर आम जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।
-
जमीन होगी फ्री-होल्ड: राशि के निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होते ही इस खास महल की भूमि को लीज व्यवस्था से मुक्त कर हमेशा के लिए 'फ्री-होल्ड' कर दिया जाएगा।
डिजिटल और जनोन्मुखी बनेगा राजस्व विभाग: मंत्री जायसवाल
डॉ. दिलीप जायसवाल ने विभाग की अन्य बड़ी उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन में भूमि प्रबंधन और राजस्व प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल और आम जनता के अनुकूल बनाया जा रहा है।
विभाग में हो रहे डिजिटल बदलावों के कारण अब भूमि अभिलेखों (Land Records) के डिजिटलीकरण, ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार, विशेष भूमि सर्वेक्षण, सीमांकन विवादों के त्वरित निपटारे और भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिल रही है।
विकास योजनाओं के लिए 1380 एकड़ सरकारी भूमि आवंटित
बिहार में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के लिए भी विभाग ने तेजी से काम किया है:
-
योजनाओं को रफ्तार: चालू वित्तीय वर्ष में राज्य की 28 केंद्रीय और राज्य स्तरीय बड़ी विकास योजनाओं के लिए 1380.59 एकड़ सरकारी भूमि तत्काल उपलब्ध कराई गई है। इससे शिक्षा, चमचमाती सड़कों, ऊर्जा (बिजली), सुरक्षा, खेल पर्यटन और नए उद्योगों की स्थापना के काम में तेजी आएगी।
-
बड़ा भूमि अधिग्रहण: महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए वर्तमान में 45,748 एकड़ भूमि का अधिग्रहण (Land Acquisition) करने की कार्रवाई अंतिम चरणों में चल रही है।
अगले 2 से 3 साल में पूरा होगा बिहार भूमि सर्वे का काम
राजस्व मंत्री ने प्रदेश के बहुप्रतीक्षित भूमि सर्वे (Land Survey) को लेकर भी स्थिति साफ की है। उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि राज्य में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण का कार्य अगले 2 से 3 वर्षों के भीतर हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।
इसके अलावा, सरकार ने हाल ही में भूमि का सर्किल रेट (MVR) बढ़ा दिया है, जिसका सीधा आर्थिक लाभ किसानों को अपनी जमीन के मुआवजे के रूप में मिलेगा। साथ ही, भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए बहुत जल्द एक राज्यव्यापी विशेष अभियान भी शुरू किया जाएगा।