बिहार के बाढ़ पीड़ित मछुआरों के लिए बड़ी राहत! नाव-जाल और तालाब के नुकसान पर मिलेगी मदद
बिहार में बाढ़ के विनाशकारी प्रभाव से आजीविका का संकट झेल रहे मछुआरों और मत्स्य किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जलप्रलय के कारण नाव, जाल, चारे और तालाबों का भारी नुकसान उठाने वाले प्रभावित परिवारों को अपने पैरों पर दोबारा खड़ा करने के लिए सरकार ने विशेष वित्तीय सहायता योजना लागू कर दी है। अलग-अलग स्तर के नुकसान का व्यवस्थित आकलन कर राहत राशि निर्धारित की गई है ताकि मत्स्य पालक बिना किसी वित्तीय बाधा के अपना पारंपरिक व्यवसाय दोबारा शुरू कर सकें।
नाव की मरम्मत और नई नाव खरीदने के लिए सहायता राशि
बाढ़ के तेज बहाव में नावों को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने दो अलग-अलग स्लैब में राहत राशि तय की है। यदि किसी मछुआरे की गैर-यंत्रीकृत (बिना इंजन वाली पारंपरिक) नाव आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई है, तो उसकी मरम्मत के लिए 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। वहीं, यदि नाव पूरी तरह नष्ट या बह गई है, तो उसके स्थान पर नई नाव खरीदने के लिए सरकार की ओर से 15,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
मछली पकड़ने के जाल के नुकसान पर भी मुआवजा तय
नाव के साथ-साथ आजीविका के मुख्य साधन यानी मछली पकड़ने के जाल (नेट) के नुकसान पर भी स्पष्ट मुआवजा तय किया गया है-
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आंशिक नुकसान: जाल के आंशिक रूप से फटने या खराब होने की स्थिति में 3,000 रुपये की मदद मिलेगी।
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पूर्ण नुकसान: जाल पूरी तरह खराब होने, बह जाने या गुम हो जाने पर 4,000 रुपये की राहत राशि दी जाएगी।
तालाब पुनर्निर्माण और मछली चारे पर इनपुट सब्सिडी
बाढ़ के पानी से बर्बाद हुए मत्स्य फार्मों और जलाशयों को दोबारा उपयोग लायक बनाने के लिए भी बड़ा प्रावधान किया गया है। छोटे और सीमांत मत्स्य किसानों को मछलियों के पोषण और आहार के लिए 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से इनपुट सब्सिडी मुहैया कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त, गाद भरने या कटान से क्षतिग्रस्त हुए तालाबों और फार्मों की री-मॉडलिंग व मरम्मत के लिए अधिकतम 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
पात्रता की शर्तें और आवेदन की सीधी प्रक्रिया
इस विशेष राहत योजना का लाभ केवल उन्हीं प्रभावित मत्स्य पालकों को दिया जाएगा, जिन्होंने संबंधित नुकसान के बदले किसी अन्य राज्य या केंद्र सरकार की योजना से पूर्व में मुआवजा प्राप्त नहीं किया है। हालांकि, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की नियमित एकमुश्त सब्सिडी लेने वाले किसान इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे। योजना का लाभ उठाने, क्षति का सत्यापन कराने और आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए मछुआरे अपने-अपने जिले के जिला मत्स्य पदाधिकारी (DFO) के कार्यालय से सीधे संपर्क कर सकते हैं या संबंधित विभागीय पोर्टल पर जाकर दिशा-निर्देश देख सकते हैं।