35 साल की उम्र और बच्चा नहीं तो हो जाएगा ब्रेस्ट कैंसर?': एक्सपर्ट्स ने खोली पोल

35 साल की उम्र और बच्चा नहीं तो हो जाएगा ब्रेस्ट कैंसर?': एक्सपर्ट्स ने खोली पोल

आज के भागदौड़ भरे आधुनिक और कॉर्पोरेट युग में महिलाओं की जीवनशैली, खान-पान और करियर को लेकर प्राथमिकताएं पूरी तरह से बदल चुकी हैं। आज के समय में महिलाएं शादी और परिवार की योजना बनाने से पहले अपने करियर और आर्थिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता देती हैं, जिसके कारण मातृत्व की आयु में स्वाभाविक रूप से काफी बदलाव आया है। समाज में अक्सर यह एक बहुत बड़ी और डरावनी बात कही जाती है कि यदि किसी महिला ने 35 वर्ष की आयु तक बच्चे को जन्म नहीं दिया, तो उसे निश्चित रूप से स्तन कैंसर यानी ब्रेस्ट कैंसर का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह के दावों और सामाजिक बयानों के कारण अनगिनत महिलाओं के मन में एक अज्ञात भय और मानसिक तनाव घर कर जाता है, जिससे वे खुद को ही दोषी मानने लगती हैं। लेकिन क्या वाकई चिकित्सा विज्ञान इस बात की पुष्टि करता है कि केवल 35 की उम्र के बाद बिना बच्चे के रहना ही ब्रेस्ट कैंसर का एकमात्र कारण है? आज के इस दौर में जहां स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रामक जानकारियां सोशल मीडिया पर तेजी से फैलती हैं, यह बेहद आवश्यक हो गया है कि इस विषय की तह तक जाया जाए और मेडिकल एक्सपर्ट्स के जरिए यह पता लगाया जाए कि इस प्रचलित दावे में असल सच्चाई कितनी है और क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार मौजूद है भी या नहीं।

मेडिकल साइंस और ऑन्कोलॉजिस्ट की नजर में 35 की उम्र और मातृत्व का ब्रेस्ट कैंसर से क्या है संबंध

जब देश और दुनिया के नामी-गिरामी कैंसर विशेषज्ञ यानी ऑन्कोलॉजिस्ट से इस लोकप्रिय दावे के बारे में बात की जाती है, तो वे इसे एक सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल एक अधूरा सच या भ्रामक धारणा करार देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मातृत्व में देरी होना और स्तन कैंसर के जोखिम बढ़ना आपस में जुड़े जरूर हो सकते हैं, लेकिन इसे इस रूप में पेश करना कि 35 की उम्र पार करते ही हर संतानहीन महिला को कैंसर हो जाएगा, पूरी तरह से गलत और अवैज्ञानिक है। चिकित्सा शोध यह बताते हैं कि जिन महिलाओं को कम उम्र में बच्चे होते हैं या जो स्तनपान कराती हैं, उनके शरीर में कुछ ऐसे हॉर्मोनल बदलाव होते हैं जो स्तन कैंसर के जोखिम को थोड़ा कम कर सकते हैं। इसके विपरीत, यदि किसी महिला ने 35 या उसके बाद बच्चे को जन्म दिया है या वह अविवाहित है, तो इसका यह कतई मतलब नहीं है कि उसे कैंसर होना तय है। महिलाओं में स्तन कैंसर होने के पीछे केवल उम्र या बच्चे न होने की स्थिति ही जिम्मेदार नहीं होती, बल्कि इसके साथ कई अन्य आंतरिक और बाहरी कारक भी बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर के वास्तविक और मुख्य कारण क्या हैं जिन्हें नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के पीछे किसी एक सिंगल कारण को जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जाता है, क्योंकि इसके विकास के पीछे कई जटिल कारक काम करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पारिवारिक इतिहास यानी जेनेटिक्स (Genetics) और परिवार में पहले किसी को ब्रेस्ट कैंसर होना सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है। इसके अलावा, शरीर में अत्यधिक मोटापा, खराब जीवनशैली, नियमित रूप से शराब या तंबाकू का सेवन, शारीरिक सक्रियता की कमी और हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का लंबे समय तक इस्तेमाल भी इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देता है। आधुनिक महिलाओं में बदलती दिनचर्या, अत्यधिक तनाव, जंक फूड का सेवन और नींद की कमी भी उनके इम्यून सिस्टम और हॉर्मोन संतुलन को प्रभावित करते हैं। इसलिए, केवल यह मानकर बैठ जाना कि चूंकि आपकी उम्र 35 से अधिक है या आपके कोई बच्चा नहीं है, इसलिए आप कैंसर की गिरफ्त में आ जाएंगी, पूरी तरह से तर्कहीन है। इसके बजाय महिलाओं को अपनी जीवनशैली को सुधारने और नियमित मेडिकल जांच करवाने पर ध्यान देना चाहिए ताकि समय रहते किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।

मिथकों से बाहर निकलें और नियमित मैमोग्राफी तथा स्वास्थ्य जांच को बनाएं अपनी दिनचर्या

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही किसी भी बीमारी से बचाव का सबसे पहला और सबसे मजबूत हथियार होती है, और महिलाओं को इस दिशा में बिना किसी डर के आगे आना चाहिए। समाज में फैले इन डरावने मिथकों और दबी जुबान से होने वाली बातों से डरने के बजाय महिलाओं को समय-समय पर अपनी मेडिकल स्क्रीनिंग और सेल्फ-एक्जामिनेशन करवाना चाहिए। 40 वर्ष की आयु के बाद डॉक्टरों की सलाह से मैमोग्राफी (Mammography) जैसे परीक्षण करवाने से शरीर के भीतर होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव का शुरुआती दौर में ही पता लगाया जा सकता है, जिससे इलाज बेहद आसान हो जाता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, सकारात्मक सोच और मानसिक शांति को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर किसी भी गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए, इस बात से पूरी तरह बेफिक्र हो जाइए कि 35 की उम्र में बच्चा न होने से आपको कैंसर हो जाएगा, और अपनी सेहत की कमान खुद अपने हाथों में लेते हुए एक जागरूक, स्वस्थ और सशक्त जीवन की ओर कदम बढ़ाइए।