भरत तिवारी एनकाउंटर पर भाई वीरेंद्र का सम्राट सरकार को अल्टीमेटम: बोले– 'सरकार को भी हत्या का अधिकार नहीं
बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर (Bharat Tiwari Encounter Case) को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ और मुखर विधायक भाई वीरेंद्र (Bhai Virendra) ने इस कथित पुलिस मुठभेड़ को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार (25 जून 2026) को मीडिया से बात करते हुए आरजेडी विधायक ने पुलिसिया एनकाउंटर की थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े किए और इसे 'फर्जी' करार दिया।
"पुलिस के पास अत्याधुनिक हथियार, क्रिमिनल के पास कट्टा... कैसे होगी मुठभेड़?"
भाई वीरेंद्र ने पुलिस द्वारा दिखाए जाने वाले एनकाउंटर के तौर-तरीकों पर तंज कसते हुए कहा कि अक्सर एनकाउंटर के बाद यह कहानी गढ़ी जाती है कि अपराधी के पास से हथियार बरामद हुए। उन्होंने सवाल उठाया:
"जब मौके पर 10 पुलिसकर्मी अत्याधुनिक और ऑटोमैटिक हथियारों के साथ तैनात रहते हैं, और जिसे आप क्रिमिनल घोषित करते हैं उसके पास सिर्फ एक देसी कट्टा होता है, तो वह पुलिस बल पर कैसे भारी पड़ सकता है? एनकाउंटर करने का अधिकार किसी को नहीं है।"
उन्होंने आगे साफ किया कि यदि दोनों तरफ से वाकई आमने-सामने की अंधाधुंध गोलीबारी (Genuine Encounter) होती है और उसमें किसी को गोली लगती है, तो उस स्थिति पर उन्हें कुछ नहीं कहना है। लेकिन पकड़कर मारना और उसे मुठभेड़ का नाम देना पूरी तरह गलत है।
अपराधियों के एनकाउंटर में 'जाति और धर्म' का खेल: भाई वीरेंद्र
आरजेडी विधायक ने इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में हावी होने वाले जातिगत और धार्मिक एंगल पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सरकार और प्रशासनिक तंत्र की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा:
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पिछड़ा और मुस्लिम: जब समाज के किसी पिछड़े वर्ग के व्यक्ति को मार गिराया जाता है, तो उसे 'बहुत बड़ा अपराधी' घोषित कर दिया जाता है। वहीं, अगर किसी मुसलमान का एनकाउंटर होता है, तो उसे सीधे 'आतंकवादी' का टैग दे दिया जाता है।
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दलित: यदि किसी दलित वर्ग के व्यक्ति की मुठभेड़ में मौत होती है, तो प्रशासन उसका कनेक्शन तुरंत 'नक्सलियों' से जोड़ देता है।
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अगड़ी जाति: इसके विपरीत, जब किसी अन्य (अगड़ी जाति) के व्यक्ति के साथ ऐसी घटना होती है, तो उसे 'शहीद' का दर्जा देने की मांग उठने लगती है। यह बेहद आश्चर्यजनक और भेदभावपूर्ण रवैया है।
"अपराधी की कोई जाति नहीं होती, लेकिन हत्या तो हत्या है"
भाई वीरेंद्र ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी अपराधी या अपराध के समर्थन में नहीं हैं, क्योंकि 'क्रिमिनल की कोई जाति नहीं होती।' लेकिन कानून हाथ में लेने की इजाजत सरकार को भी नहीं दी जा सकती।
सरकार को चेतावनी: "मैं साफ कहूंगा कि हत्या तो सिर्फ हत्या होती है, चाहे वह कोई भी करे। सूबे की सरकार को भी किसी नागरिक की हत्या करने का कानूनी अधिकार नहीं मिला है। संविधान और कानून के तहत सरकार को सिर्फ अपराधियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने का अधिकार है। मैं सरकार को आगाह करूँगा कि वह कानून के दायरे में रहकर काम करे। भरत तिवारी की जो हत्या हुई है, वह पूरी तरह फर्जी है।"
गौरतलब है कि इस एनकाउंटर के बाद पीड़ित परिवार से मिलने स्थानीय एसपी (SP) भी पहुंचे थे, जहां परिजनों के दर्द को देखकर उन्होंने निष्पक्षता से उनकी बातें सुनी थीं। अब इस मामले में विपक्ष के कूदने से नीतीश-सम्राट सरकार की कानून व्यवस्था पर दबाव और बढ़ गया है।