नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे RCP सिंह, पर बिना बात किए ही निकले मुख्यमंत्री; आवास के बाहर समर्थकों का भारी हंगामा
बिहार की सियासत में शनिवार को एक ऐसा नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी और कभी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सबसे कद्दावर नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह (RCP Singh) अचानक नीतीश कुमार से मुलाकात करने उनके आधिकारिक आवास 7 सर्कुलर रोड पहुंचे।
आरसीपी सिंह के साथ उनके समर्थकों की भारी भीड़ भी मौजूद थी। लेकिन, इस बहुचर्चित मुलाकात का जो अंत हुआ, उसने दोनों नेताओं के बीच की कड़वाहट और दूरियों को एक बार फिर जगजाहिर कर दिया है।
मुलाकात कक्ष में लंबा इंतजार, पर बातचीत के नाम पर सिर्फ 'प्रणाम'
प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, आरसीपी सिंह अपने समर्थकों के साथ नीतीश कुमार के आवास के मुलाकात कक्ष (Meeting Room) में काफी देर तक बैठे रहे। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वहां पहुंचे। दोनों नेता आमने-सामने तो आए, लेकिन उनके बीच सिर्फ औपचारिक 'प्रणाम' का आदान-प्रदान हुआ। नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह से कोई खास बातचीत या सियासी चर्चा नहीं की और महज कुछ ही पलों में वहां से बाहर निकल गए। इसके तुरंत बाद मायूस आरसीपी सिंह को भी समर्थकों के साथ बाहर आना पड़ा। आरसीपी सिंह ने खुद इस संक्षिप्त मुलाकात की तस्वीर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट की है।
एमएलसी संजय गांधी और ललन सराफ के खिलाफ जोरदार नारेबाजी
आरसीपी सिंह जैसे ही नीतीश आवास से बाहर निकले, वहां मौजूद उनके समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। समर्थकों ने जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं और एमएलसी (MLC) संजय गांधी व ललन सराफ के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
समर्थकों का सीधा आरोप:
समर्थकों ने खुलेआम आरोप लगाया कि संजय गांधी और ललन सराफ जैसे नेता जानबूझकर नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह के बीच की दूरियों को कम नहीं होने दे रहे हैं। इन नेताओं की घेरेबंदी की वजह से ही आज मुख्यमंत्री ने आरसीपी सिंह से विस्तृत बातचीत नहीं की।
कभी थे नीतीश के 'राइट हैंड', फिर ऐसे बढ़ीं दूरियां
प्रशासनिक सेवा (IAS) से राजनीति में आए आरसीपी सिंह एक समय नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माने जाते थे। जेडीयू संगठन की पूरी कमान उन्हीं के हाथों में थी। साल 2019 में उन्हें केंद्र की मोदी सरकार में जेडीयू कोटे से केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया था। लेकिन, इसी मंत्री पद को लेकर नीतीश और आरसीपी के रिश्तों में खटास आ गई। लगातार दो बार राज्यसभा सांसद रहे आरसीपी सिंह को जब पार्टी ने तीसरी बार टिकट देने से मना कर दिया, तो उन्होंने जेडीयू से पूरी तरह दूरी बना ली थी।
क्या हैं इस 'मूक मुलाकात' के सियासी मायने?
बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस संक्षिप्त मुलाकात को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है:
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औपचारिक शिष्टाचार या सोची-समझी रणनीति? जेडीयू के कुछ गुट इसे महज एक शिष्टाचार मुलाकात बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरसीपी सिंह एक बार फिर जेडीयू की मुख्यधारा में सक्रिय होने की जमीन तलाश रहे हैं।
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बढ़ता सस्पेंस: मुख्यमंत्री का बिना बात किए कमरे से निकल जाना साफ संकेत देता है कि नीतीश कुमार के दिल में आरसीपी सिंह के लिए जमी बर्फ अभी पिघली नहीं है।
आगामी चुनावों को देखते हुए क्या यह मुलाकात बिहार में किसी नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत है या दूरियों का परमानेंट ठप्पा, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।