सम्राट चौधरी को सीएम पद से हटाने के लिए संजय झा करा रहे हैं बदनाम

सम्राट चौधरी को सीएम पद से हटाने के लिए संजय झा करा रहे हैं बदनाम

सियासत में मचा भारी हड़कंप

बिहार की राजनीति एक बार फिर अपनी तीखी बयानबाजी और अंदरूनी खींचतान के चलते राष्ट्रीय पटल पर सुर्खियों में आ गई है。 राज्य के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त भारी भूचाल आ गया जब जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निष्कासित किए जा चुके एक नेता ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और खास तौर पर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा (Sanjay Jha) के खिलाफ बेहद गंभीर और विस्फोटक आरोप लगा दिए。 निष्कासित नेता के इन दावों के मुताबिक, जेडीयू के कुछ बड़े नेता और खास तौर पर संजय झा मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) को उनके पद से हटाने और उन्हें राजनीतिक रूप से अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं। इतना ही नहीं, यह भी आरोप लगाया गया है कि पर्दे के पीछे से मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल करने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। एनडीए गठबंधन के भीतर मचे इस सियासी घमासान और बयानों के तीखे तीरों ने विपक्ष को भी सरकार पर निशाना साधने का नया मौका दे दिया है। बिहार की राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से भले ही जमीनी स्तर पर सरकार को कोई तत्काल खतरा न हो, लेकिन सत्ताधारी दल के भीतर चल रही अंतर्कलह खुलकर सड़क पर आ गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पूरे विवाद के पीछे की असल सच्चाई क्या है और किसने किस पर क्या गंभीर आरोप लगाए हैं।

जेडीयू से निष्कासित नेता छोटू सिंह के तीखे हमले: संजय झा पर लगाए केंद्रीय मंत्री बनने की होड़ और साजिश के आरोप

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब जेडीयू के पूर्व और निष्कासित नेता छोटू सिंह ने मीडिया के सामने आकर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छोटू सिंह वही नेता हैं जिन्हें कुछ समय पहले पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता और तीखी बहस के बाद छह साल के लिए जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। मीडिया से बातचीत के दौरान छोटू सिंह ने बहुत ही आक्रामक तेवर अपनाते हुए दावा किया कि संजय झा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पार्टी के भीतर ही समानांतर एजेंडा चला रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय झा की नजरें केंद्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण पद यानी केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की कुर्सी पर टिकी हुई हैं, और इसके लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि संजय झा अपने दम पर आज तक कोई भी सीधा चुनाव नहीं जीत पाए हैं, और यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का वरदहस्त और आशीर्वाद उनके ऊपर से हट जाए, तो उनकी राजनीतिक हैसियत एक स्थानीय निकाय के चुनाव जीतने जितनी भी नहीं बचेगी।

"सम्राट चौधरी को स्थिर नहीं देखना चाहते कुछ खास नेता": मुख्यमंत्री की छवि को लेकर दिए गए बड़े बयान

अपने बयानों में छोटू सिंह ने सीधे तौर पर यह सनसनीखेज दावा किया कि जेडीयू के भीतर कुछ गिने-चुने नेताओं का एक ऐसा गुट सक्रिय है जो मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को चैन से काम नहीं करने देना चाहता। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी एक मजबूत और जमीनी नेता के रूप में राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर का एकछत्र प्रभाव चाहने वाला यह धड़ा लगातार उन्हें और उनकी कार्यशैली को लेकर भ्रम फैला रहा है। बयानों के मुताबिक, मुख्यमंत्री को जनता की नजरों में कमजोर दिखाने और उनके बीच अलोकप्रिय बनाने के लिए अंदरखाने साजिशें रची जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में एनडीए की डबल इंजन सरकार के भीतर मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक वर्चस्व को लेकर समय-समय पर इस तरह की सुगबुगाहटें अंदरखाने चलती रहती हैं, लेकिन इस तरह खुलकर किसी पूर्व नेता द्वारा सार्वजनिक मंच से सनसनीखेज आरोप लगाना गठबंधन के स्वास्थ्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और विपक्ष को मिला बैठे-बिठाए बैठे-बिठाए नया राजनीतिक हथियार

जैसे ही जेडीयू के भीतर से इस तरह के बयानों के वीडियो और खबरें वायरल हुईं, विपक्षी दलों ने तुरंत इस मुद्दे को लपक लिया। राजद (RJD) और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि एनडीए गठबंधन के घटक दलों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और आने वाले दिनों में यह अंतर्निहित फूट और अधिक गहरी होकर सामने आएगी। हालांकि, जेडीयू और बीजेपी के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक निष्कासित और हताश नेता की व्यक्तिगत बयानबाजी करार दिया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जेडीयू नेतृत्व पूरी तरह एकजुट होकर राज्य के विकास के एजेंडे पर काम कर रहे हैं और इस तरह के अनर्गल बयानों का सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। बहरहाल, इन बयानों के बाद बिहार की राजधानी पटना से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में बैठकों और कयासों का दौर एक बार फिर तेज हो गया है।